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मुस्कुराता बस्तर कार्यशाला में बच्चों की कला ने बिखेरे रंग, कार्टून-कैरिकेचर से दिखी सकारात्मक तस्वीर

Chhattisgarh RRT News Desk 04 August 2026

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रायपुर, 4 अगस्त 2026। बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई दिशा देने के उद्देश्य से जगदलपुर में ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरते हुए रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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विशेषज्ञों ने सिखाईं कार्टून और कैरिकेचर की बारीकियां

कार्यशाला में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे वरिष्ठ कार्टूनिस्ट और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून एवं कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकों की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि किसी भी चित्र की बेहतर शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके बाद रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों का चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी तरीके से उकेरने की तकनीक समझाई गई। बच्चों को पूरी प्रक्रिया सरल और चरणबद्ध तरीके से सिखाई गई।

प्रशिक्षण से बच्चों का बढ़ा आत्मविश्वास

स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि कार्यशाला में मिले प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कला के प्रति उनकी रुचि भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।

वहीं, सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राओं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने बताया कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के बाद अब कार्टून और कैरिकेचर बनाना उनके लिए काफी आसान हो गया है।

कल्पनाशीलता को मिली नई दिशा

सेजेस नानगुर की छात्राओं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने कहा कि वरिष्ठ कलाकारों से मिला मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा। साथ ही उन्हें कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी मिली है।

कला के जरिए बस्तर की सकारात्मक पहचान को मंच

‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला ने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से सामने रखने का अवसर दिया।

कार्टून और कैरिकेचर जैसे रचनात्मक माध्यमों के जरिए बस्तर की संस्कृति, प्रकृति और सकारात्मक पहलुओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।

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