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‘हीट रेज़िलिएंट स्मार्ट सिटी’ बनाने की तैयारी: नगर निगम में विशेषज्ञों ने बढ़ती गर्मी और अर्बन हीट आइलैंड पर जताई चिंता, श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बनेगी रणनीति

राजधानी रायपुर में बढ़ती गर्मी और लू (हीटवेव) के खतरों से निपटने के लिए रायपुर नगर निगम और सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) ने अमिटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से एक महत्वपूर्ण राउंडटेबल चर्चा का आयोजन किया। “संवेदनशील शहरी श्रमिकों में हीट रेज़िलिएंस विकसित करना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने अध्यक्षता की। चर्चा का मुख्य उद्देश्य निर्माण श्रमिकों, सफाई कर्मियों और फुटपाथ विक्रेताओं जैसे बाहरी कामकाजी वर्गों को अत्यधिक गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एक समावेशी रणनीति तैयार करना था।

रायपुर में रातें हो रही हैं गर्म: विशेषज्ञ
अमिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पीयूष कांत पाण्डेय ने रायपुर की जलवायु पर चौंकाने वाले तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी शहरों की तुलना में रायपुर की स्थिति अलग है; यहाँ रात का तापमान अक्सर 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव के कारण पिछले 15 वर्षों में शहर के तापमान में करीब 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई है। इसका मुख्य कारण घटते तालाब, सिमटती हरियाली और अनियंत्रित कंक्रीट का विस्तार है। उन्होंने 'वेट-बल्ब टेम्परेचर' और उच्च आर्द्रता के खतरों के प्रति भी आगाह किया।
जलाशयों का संरक्षण और शहरी नियोजन
चर्चा में शहर के जलाशयों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि रायपुर के तालाब स्थानीय 'माइक्रोक्लाइमेट' को संतुलित करने और भूजल स्तर बनाए रखने में संजीवनी का काम करते हैं। वहीं, CEED की डॉ. देवयानी शर्मा ने अमिटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से किए गए एक सर्वेक्षण के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। इस सर्वे में सामने आया कि अत्यधिक गर्मी के कारण श्रमिकों की कार्यक्षमता घट रही है और निर्जलीकरण (Dehydration) के कारण उनकी आय और स्वास्थ्य पर गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत
स्वास्थ्य सत्र में डॉ. स्मृति देवांगन ने अर्ली वार्निंग सिस्टम (समय पूर्व चेतावनी) और जन-जागरूकता को संवेदनशील समुदायों के लिए ढाल बताया। राउंडटेबल में शामिल CREDAI, चैंबर ऑफ कॉमर्स, श्रम विभाग और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने निम्नलिखित सुझावों पर बल दिया:
हीट-रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर: शहरी डिजाइन और निर्माण में कूलिंग इंटरवेंशन को शामिल करना।
श्रमिक सुविधाएं: कार्यस्थलों पर छाया, ठंडा पानी और ओआरएस की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
ग्रीन कवर: शहरी हरित क्षेत्रों और टिकाऊ कूलिंग उपायों का विस्तार।
महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कार्यक्रम के समापन पर कहा कि रायपुर को न केवल तकनीकी रूप से बल्कि जलवायु के प्रति लचीला (Heat-Resilient) स्मार्ट सिटी बनाना हमारी प्राथमिकता है। कार्यक्रम में नगर निगम के अधिकारियों, सफाई कर्मियों और विशेषज्ञों ने भविष्य की कार्ययोजना पर सहमति जताई। अंत में श्री तुषार शर्मा ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।







