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निगम की 'कंगाली' आई सामने! उधारी बंद हुई तो पेट्रोल खत्म, ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचीं सभापति; शहर में चर्चा गर्म

धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी नगर निगम की आर्थिक स्थिति इन दिनों काफी नाजुक दौर से गुजर रही है। आलम यह है कि नगर निगम को अब पेट्रोल-डीजल भी उधारी में मिलना बंद हो गया है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से बकाया भुगतान न होने के कारण स्थानीय पेट्रोल पंप संचालकों ने निगम की गाड़ियों में ईंधन भरने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके चलते नगर निगम के सरकारी वाहनों के पहिए थम गए हैं और अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जब ई-रिक्शा से 'मैडम' पहुंचीं दफ्तर
निगम की इस बदहाली की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब नगर निगम की सभापति को अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। सभापति जब ई-रिक्शा में सवार होकर निगम कार्यालय पहुंचीं, तो वहां मौजूद कर्मचारी और आम जनता दंग रह गई। यह वाक्या शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे निगम प्रबंधन की विफलता मान रहे हैं। सभापति का इस तरह दफ्तर पहुंचना सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी था।
कामकाज पर पड़ा बुरा असर, सफाई व्यवस्था ठप
डीजल-पेट्रोल की किल्लत का असर केवल अधिकारियों के दौरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कचरा ढोने वाली गाड़ियां और सफाई अभियान में लगे वाहन ईंधन की कमी के कारण डिपो में ही खड़े हैं। यदि जल्द ही भुगतान की व्यवस्था नहीं की गई, तो शहर में गंदगी का अंबार लग सकता है। कर्मचारी संघ और पार्षदों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और प्रशासन से फंड रिलीज करने की मांग की है।
आखिर क्यों खाली हुआ निगम का खजाना?
सूत्रों की मानें तो टैक्स वसूली में कमी और राज्य शासन से मिलने वाली राशि में देरी की वजह से ऐसी नौबत आई है। नगर निगम पर पेट्रोल पंपों का लाखों रुपये का बकाया है। हालांकि, अधिकारी अब जल्द ही बीच का रास्ता निकालने की बात कह रहे हैं ताकि जरूरी सेवाओं के लिए ईंधन की आपूर्ति बहाल हो सके। धमतरी की यह घटना प्रदेश के अन्य नगर निगमों के लिए भी एक सबक है कि वित्तीय प्रबंधन में जरा सी चूक सरकारी साख को कैसे दांव पर लगा सकती है।





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