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जल संरक्षण से बदलेगी किसानों की तस्वीर, 47 आजीविका डबरियों से बढ़ेगी आमदनी

Chhattisgarh RRT News Desk 06 August 2026

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रायपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रहा है। जांजगीर-चांपा जिले में जल संरचनाओं के निर्माण से सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ कृषि और मत्स्य पालन को भी नया आधार मिल रहा है।

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47 आजीविका डबरियों को मिली मंजूरी

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के तहत जांजगीर-चांपा जिले में 47 आजीविका डबरियों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इनमें से 35 डबरियों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 4 डबरियों का निर्माण अभी प्रगति पर है।

बारिश के पानी से भर चुकी इन डबरियों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे खेती का रकबा बढ़ने और कृषि उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है।

14 डबरियों में शुरू हुआ मत्स्य पालन

आजीविका डबरियां अब सिर्फ जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन रही हैं। जिले की 14 डबरियों में मत्स्य पालन और कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की खेती कर किसान अतिरिक्त उत्पादन हासिल कर रहे हैं।

सिंचाई के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

अभियान के तहत सोख्ता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब गहरीकरण और खेत-पोंड जैसी जल संरचनाओं पर काम किया जा रहा है। इससे बारिश के पानी का संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

सरकार का उद्देश्य जल संरक्षण को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर किसानों को कृषि, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है।

जल संरक्षण को बनाया जा रहा जनआंदोलन

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के जरिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जल संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ रही है, वहीं किसानों के लिए आय के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

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