Breaking
- Festival News: कमरछठ 2026 में जानिए अंग्रेजी मिर्च, पसहर चावल और छह भाजी का म...
- Health News: छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट, 130 मामलों की पुष्टि; 3...
- हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा प्रदेश : वन मंत्...
- Raipur Education News: नवप्रवेशित छात्राओं को राज्यपाल रमेन डेका की सीख, वर्त...
- Education News: नवा रायपुर में खुलेगा NMIMS कैंपस, 10 हजार विद्यार्थियों को म...
- Chhattisgarh UCC News: बस्तर से सरगुजा तक UCC पर मंथन, आदिवासी परंपराओं और मह...
- Chhattisgarh UCC News: बस्तर से सरगुजा तक UCC पर मंथन, आदिवासी परंपराओं और मह...
- Education News: राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री साय...
- Nepal Flood Rescue: सुरंगों में फंसे 900 से ज्यादा लोगों को बचाने की चुनौती, ...
- Bhilai News: PM आवास की किश्त नहीं भरने वालों पर निगम की कार्रवाई, मकान आवंटन...
सूदखोर वीरेंद्र तोमर रायपुर पुलिस को नहीं बता पा रहा आय का जरिया, विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी में था

रायपुर। सूदखोरी के धंधे से रईसी की जिंदगी जीने वाला वीरेंद्र तोमर उर्फ रूबी पूछताछ में लगातार पुलिस को गुमराह कर रहा है। पुलिस ने वीरेंद्र के घर से कोरे स्टांप पेपर और संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए थे। वह अपनी आय का स्त्रोत नहीं बता पा रहा है, लेकिन संपत्ति को वैध बता रहा है। उसने पूछताछ में अब तक किसी भी प्रापर्टी को जबरन कब्जाने की बात नहीं मानी है।

पांच दिन की पुलिस रिमांड के बाद शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। छोटा भाई रोहित तोमर अब भी फरार है। वीरेंद्र की गिरफ्तारी उसके खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में दर्ज सूदखोरी, एक्सटार्शन और आर्म्स एक्ट के मामलों में की गई है। जानकारी के अनुसार रोहित सरेंडर करने की योजना बना रहा है।
वीरेंद्र पूछताछ में कर रहा चुप्पी, भाई से छह माह से संपर्क नहीं
गिरफ्तार वीरेंद्र तोमर पुलिस को पूछताछ में कोई विशेष जानकारी नहीं दे रहा है। पुलिस जब उससे भाई रोहित के बारे में पूछताछ कर रही है, तो उसने बताया कि पिछले छह माह से दोनों भाइयों में कोई संपर्क नहीं हुआ है। वीरेंद्र पुलिस को यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि उसकी संपत्ति सूदखोरी से नहीं, बल्कि मेहनत की कमाई से अर्जित है और इसके लिए वह मनगढ़ंत कहानियां सुना रहा है।
अंडा ठेला, ऑटो और फल का धंधा सूदखोरी का जरिया
पुलिस पूछताछ में वीरेंद्र ने बताया कि दोनों भाई टिकरपारा थाना क्षेत्र के पुजारी नगर में किराए के मकान में रहते थे। शुरुआत में दोनों ने अंडा ठेला लगाया, फिर किराए का ऑटो चलाया और बाद में अपना ऑटो खरीद लिया। ऑटो चलाने के बाद दोनों ने फल का कारोबार शुरू किया। इसी दौरान कुछ रकम जमा हुई, जिसे उन्होंने खोमचा और ठेला लगाने वालों को ब्याज पर देना शुरू किया जो सूदखोरी में बदल गया।
विधायक बनने की तैयारी में था वीरेंद्र
सूत्रों के मुताबिक, वीरेंद्र तोमर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में था। वह अलग-अलग राजनीतिक दलों के संपर्क में था और करणी सेना की आड़ में धार्मिक आयोजन व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करता था। राजनीतिक छवि सुधारने के लिए उसने पिछले चार-पांच सालों में सूदखोरी से दूरी बना ली थी। हालांकि, इस काम को उसने अपने भाई रोहित और भतीजे दिव्यांश के जरिये जारी रखा था।







