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Aviation News: मोदी सरकार का 15 दिनों में 'यू-टर्न', फ्लाइट्स में 60% फ्री सीटों का फैसला वापस; जानें क्या है बड़ी वजह

RRT News -केंद्र की मोदी सरकार ने हवाई यात्रियों को बड़ी राहत देने वाले अपने एक महत्वपूर्ण फैसले से कदम पीछे खींच लिए हैं। मात्र 15 दिन पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क (Seat Selection Fee) के उपलब्ध करानी होंगी। हालांकि, अब मंत्रालय ने एक नया आदेश जारी कर इस प्रावधान को फिलहाल 'ठंडे बस्ते' (Abeyance) में डाल दिया है। सरकार के इस अचानक आए बदलाव को विमानन क्षेत्र में बड़े 'यू-टर्न' के रूप में देखा जा रहा है।

इस फैसले को वापस लेने के पीछे का मुख्य कारण एयरलाइन कंपनियों का भारी दबाव और आर्थिक चिंताएं बताई जा रही हैं। Federation of Indian Airlines (FIA), जिसमें इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार के इस नियम का कड़ा विरोध किया था। एयरलाइंस का तर्क था कि अगर 60% सीटें फ्री कर दी गईं, तो उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बेस फेयर (मूल किराए) में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। इससे हवाई यात्रा सस्ती होने के बजाय आम आदमी के लिए और भी महंगी हो सकती थी।
मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, एयरलाइंस और 'अकासा एयर' जैसी कंपनियों ने इस नियम से परिचालन (Operational) और वाणिज्यिक (Commercial) चुनौतियों का हवाला दिया था। कंपनियों का कहना था कि भारत में विमानन किराया बाजार-आधारित है और सरकार का यह हस्तक्षेप मुक्त बाजार के नियमों के खिलाफ होगा। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि जब तक इस मुद्दे का व्यापक परीक्षण नहीं हो जाता, तब तक 60% फ्री सीट का नियम लागू नहीं होगा।
भले ही फ्री सीटों का नियम टल गया हो, लेकिन सरकार ने अन्य यात्री सुविधाओं पर अपना रुख सख्त रखा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एक ही PNR पर यात्रा करने वाले परिवारों को साथ बैठाने की कोशिश और पालतू जानवरों या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट ले जाने के पारदर्शी नियमों को एयरलाइंस को मानना ही होगा। वर्तमान में, एयरलाइंस वेब चेक-इन के दौरान पसंदीदा सीटों के लिए 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक वसूलती हैं, जो आगे भी जारी रह सकता है।







