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मिशन अमृत की रफ्तार सुस्त: हजारों करोड़ की योजना कागजों में अटकी

Chhattisgarh 05 January 2026

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रायपुर। शहरों में शुद्ध पेयजल और बेहतर सीवरेज व्यवस्था का सपना दिखाने वाली मिशन अमृत योजना छत्तीसगढ़ में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद जमीनी स्तर पर काम बेहद धीमा है, जिससे आम लोगों को अब तक योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।

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राज्य को मिशन अमृत के तहत बड़ी धनराशि मिली, ताकि शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति मजबूत हो, सीवरेज सिस्टम विकसित हो और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके। इसके बावजूद अधिकांश परियोजनाएं फाइलों और टेंडर प्रक्रियाओं में उलझी नजर आ रही हैं।

जल और सीवरेज योजनाओं में देरी

कई नगर निगमों और नगर पालिकाओं में नई जलापूर्ति योजनाएं शुरू तो की गईं, लेकिन पाइपलाइन बिछाने, ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण और घर-घर नल कनेक्शन जैसे कार्य तय समय पर पूरे नहीं हो सके। कुछ शहरों में काम शुरू होने के बाद लंबे समय तक ठप रहने की शिकायतें सामने आई हैं।

सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट भी कछुआ चाल से आगे बढ़ रहे हैं। इससे नालों और नदियों में गंदे पानी की समस्या बनी हुई है, जिसका सीधा असर पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

लक्ष्य बड़े, तैयारी कमजोर

योजना का उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना और शहरी स्वच्छता को बेहतर बनाना है, लेकिन संसाधनों के सही उपयोग और मॉनिटरिंग की कमी के चलते लक्ष्य पूरे होते नहीं दिख रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते काम की गति नहीं बढ़ाई गई, तो योजना का लाभ समय सीमा के भीतर मिल पाना मुश्किल होगा।

जनता की उम्मीदें, शासन के सामने चुनौती

शहरों में पानी की समस्या, लीकेज वाली पाइपलाइन और अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था पहले से ही लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में मिशन अमृत से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन काम की धीमी रफ्तार ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

अब जरूरत है कि शासन और संबंधित विभाग काम की नियमित समीक्षा, जवाबदेही तय करने और जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वयन पर ध्यान दें, ताकि योजना सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रह जाए और आम जनता को वास्तविक राहत मिल सके।

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