Breaking
- Ola Electric Notice in Chhattisgarh: ओला इलेक्ट्रिक के 3,000 वाहनों का पंजीयन...
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर में नुआखाई महोत्सव के 'सेवा सम्मान पर्व' ...
- आपसी विवाद में खूनी संघर्ष, चाकूबाजी में एक युवक की मौत और दूसरा घायल, आरोपी ...
- Chhattisgarh Weather Update: छत्तीसगढ़ में लुढ़का पारा, अंबिकापुर में न्यूनतम...
- छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों को मिलने जा रहा बड़ा तोहफा, अब बढ़कर 30,870 रुपये हो...
- उद्घाटन से पहले ही रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला हाईवे में पड़ी दरारें, गुणवत्...
- Mata Hasi Devi 200th Jayanti: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर में जारी कि...
- दीपावली से पहले मिठाइयों की दुकानों पर खाद्य विभाग का छापा, फ्रीजर बंद मिलने ...
- Courtesy Meeting: राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री वि...
- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, पर...
पुलिस की बर्बरता: गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर नाबालिग को बताया गर्भवती, थाने में रातभर पीटा

CG News- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बेहद संवेदनशील और खौफनाक घटना सामने आई है। यहां के सोमनी थाना क्षेत्र में एक बीमार नाबालिग किशोरी और उसके परिजनों के साथ पुलिस द्वारा अपराधियों जैसा अमानवीय व्यवहार किया गया। पूरा मामला एक गलत मेडिकल रिपोर्ट से जुड़ा हुआ है, जिसमें सामान्य रूप से बीमार पीड़िता को लापरवाही के चलते गर्भवती दर्शा दिया गया था। इस झूठी और त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट को आधार बनाकर सोमनी थाना पुलिस ने कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने नाबालिग लड़की और उसके परिजनों को पूरी रात थाने में अवैध रूप से बिठाकर रखा। इस दौरान एक महिला कांस्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ घोर गाली-गलौज की और अपराधियों की तरह बर्बरतापूर्वक पेश आए। गंभीर आरोप है कि महिला आरक्षक ने थाने के भीतर कानून का खौफ दिखाकर बेकसूर किशोरी का गला दबाया, उसे बेरहमी से पीटा और मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया। सुबह जब मामले की सच्चाई और मेडिकल रिपोर्ट की भारी लापरवाही सामने आई, तब जाकर परिजनों को छोड़ा गया।
इस संवेदनशील मामले के उजागर होने के बाद से पूरे राजनांदगांव जिले में प्रशासनिक और पुलिसिया तंत्र के खिलाफ आम जनता और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी महिला कांस्टेबल और जिम्मेदार थाना स्टाफ के खिलाफ तत्काल निलंबन और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश जारी किए हैं, लेकिन इस वीभत्स घटना ने पुलिसिंग के मानवीय चेहरे और संवेदनशीलता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।







