RRT News: माइक्रोप्लास्टिक को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक इसे केवल हवा, पानी और भोजन के जरिए शरीर में पहुंचने वाला प्रदूषक माना जाता था, लेकिन हालिया शोध में यह सामने आया है कि माइक्रोप्लास्टिक दिल की धमनियों तक भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति हृदय रोग और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती है। खासतौर पर धूम्रपान करने वाले लोगों में इसका जोखिम कई गुना अधिक पाया गया है।
शोध के अनुसार, जिन लोगों की धमनियों में माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए, उनमें हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा अधिक देखा गया। वहीं, धूम्रपान करने वालों में यह खतरा लगभग छह गुना तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट के धुएं के साथ शरीर में पहुंचने वाले हानिकारक तत्व माइक्रोप्लास्टिक के प्रभाव को और गंभीर बना सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़ों, टायरों और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के टूटने से बनते हैं। ये कण हवा, पानी और भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, ताजा और प्राकृतिक भोजन का सेवन करना, धूम्रपान से दूरी बनाना तथा स्वच्छ वातावरण में रहना माइक्रोप्लास्टिक के प्रभाव को कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर अभी और व्यापक शोध की आवश्यकता है ताकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।


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