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भिलाई में डिजिटल लापरवाही: व्हाट्सएप पर एक्स-रे देखकर कर दिया मासूम का 'गलत' प्लास्टर; अब सूजन और दर्द से कराह रही जिंदगी....

Chhattisgarh RRT News Desk 24 January 2026

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भिलाई/दुर्ग: तकनीक का सही इस्तेमाल जान बचा सकता है, लेकिन इसका गलत प्रयोग जानलेवा भी हो सकता है। भिलाई में एक निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर ने मासूम बच्चे को बिना व्यक्तिगत रूप से देखे, केवल व्हाट्सएप पर एक्स-रे की फोटो देखकर इलाज की राय दे दी। परिणाम यह हुआ कि गलत तरीके से चढ़ाए गए प्लास्टर के कारण बच्चे का हाथ बुरी तरह सूज गया और वह दर्द से बेहाल है।

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क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, खेल-खेल में मासूम बच्चे के हाथ में चोट लग गई थी। परिजन उसे लेकर पास के एक क्लिनिक/अस्पताल पहुँचे। वहां मौजूद स्टाफ या जूनियर डॉक्टर ने मुख्य डॉक्टर को बुलाने के बजाय सुविधा का शॉर्टकट चुना:

एक्स-रे और व्हाट्सएप: बच्चे का एक्स-रे किया गया और उसकी फोटो मुख्य डॉक्टर को व्हाट्सएप पर भेज दी गई।

बिना क्लिनिकल जांच के इलाज: डॉक्टर ने फोन पर ही 'हेयरलाइन फ्रैक्चर' या अन्य समस्या बताकर प्लास्टर चढ़ाने का निर्देश दे दिया।

गलत प्लास्टर: बिना हाथ की सही पोजीशन और चोट की गंभीरता को फिजिकली चेक किए, स्टाफ ने बच्चे के हाथ पर कच्चा या पक्का प्लास्टर चढ़ा दिया।

मासूम की बढ़ी तकलीफ

प्लास्टर चढ़ने के कुछ ही घंटों बाद बच्चे के हाथ में जबरदस्त सूजन आ गई और दर्द इतना बढ़ गया कि बच्चा रात भर सो नहीं सका। जब परिजनों ने दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला कि:

प्लास्टर या तो बहुत ज्यादा टाइट था या फिर गलत एंगल पर लगाया गया था।

बिना सूजन कम हुए प्लास्टर चढ़ाने से रक्त संचार (Blood Circulation) प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया था।

'कंपार्टमेंट सिंड्रोम' का खतरा

हड्डी रोग विशेषज्ञों (Orthopedics) का कहना है कि चोट लगने के तुरंत बाद बिना देखे टाइट प्लास्टर चढ़ाना 'कंपार्टमेंट सिंड्रोम' जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसमें मांसपेशियों और नसों में रक्त का प्रवाह रुक जाता है, जिससे हाथ हमेशा के लिए खराब हो सकता है या उसे काटने तक की नौबत आ सकती है।

परिजनों का आक्रोश और कानूनी कार्रवाई की तैयारी

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया है। उनका कहना है कि अगर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, तो उन्हें रेफर कर देना चाहिए था, लेकिन फोन पर इलाज करना बच्चे की जान से खिलवाड़ है। पीड़ित परिवार अब जिला स्वास्थ्य विभाग और उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने की तैयारी कर रहा है।

डॉक्टरों की सलाह: कभी भी फोन या व्हाट्सएप पर मिले परामर्श के आधार पर सर्जिकल या ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया (जैसे प्लास्टर चढ़ाना) न करवाएं। फिजिकल चेकअप और डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है।

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