नई दिल्ली/रायपुर: प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के एक पूर्व शीर्ष कमांडर बड़से देवा ने मुख्यधारा में लौटने के बाद संगठन के भीतर के काले सच को दुनिया के सामने रखा है। ANI को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में देवा ने खुलासा किया कि नक्सली संगठन अब अपनी विचारधारा से भटक चुका है और कैडरों के बीच भारी असंतोष व्याप्त है। देवा, जो कभी बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय था, अब शांति और विकास की बात कर रहा है।
इंटरव्यू के दौरान बड़से देवा ने बताया कि संगठन के बड़े नेता निचले स्तर के कैडरों और स्थानीय आदिवासियों का केवल शोषण कर रहे हैं। उसने कहा, "संगठन के भीतर अब केवल डर का शासन है। हम जिसे क्रांति समझते थे, वह दरअसल निर्दोषों की हत्या और विकास में बाधा डालने का जरिया बन गया है।" देवा ने यह भी स्वीकार किया कि सरकार की 'आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति' ने कई नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।
"जंगलों में विकास नहीं पहुँचने दिया जाता ताकि लोग मजबूर रहें। लेकिन अब लोग जागरूक हो रहे हैं। मैंने जो समय हिंसा में बिताया, उसका मुझे पछतावा है।" — बड़से देवा (पूर्व माओवादी कमांडर)
इस खुलासे से यह भी स्पष्ट हुआ है कि सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गाँव) जैसी विकास योजनाओं ने नक्सलियों के आधार को कमजोर कर दिया है। देवा ने अन्य सक्रिय माओवादियों से भी अपील की कि वे हथियार डालें और अपने परिवार के साथ गरिमापूर्ण जीवन जिएं। उसने बताया कि संगठन के भीतर अब बाहरी और स्थानीय कैडरों के बीच भेदभाव भी एक बड़ी समस्या बन गया है।
पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस इंटरव्यू को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना है। उनका कहना है कि देवा जैसे बड़े स्तर के कमांडर का खुलकर बोलना अन्य नक्सलियों के मनोबल को तोड़ेगा। यह इंटरव्यू न केवल सुरक्षाबलों की सफलता है, बल्कि बस्तर में बदलती हवा का संकेत भी है, जहाँ अब बंदूक की जगह बैलट और विकास ले रहे हैं।








