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बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने 'भाषा' को बनाया चुनावी ढाल, बोलीं- बंगाली बोलने वालों को "घुसपैठिया" कहना बर्दाश्त नहीं

Chhattisgarh RRT News Desk 22 February 2026

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कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर 'बंगाली अस्मिता' का कार्ड खेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि बंगाली बोलने वाले लोगों को "घुसपैठिया" (Infiltrator) कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और यह बंगाल की संस्कृति का अपमान है।

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ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाषा के आधार पर लोगों को चिन्हित करना और उन्हें बाहरी बताना एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

ममता बनर्जी के संबोधन की 5 बड़ी बातें:

अस्मिता पर चोट: ममता ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज बंगाली बोलने वालों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। केवल भाषा के आधार पर किसी को घुसपैठिया कहना बंगाली अस्मिता पर हमला है।"

वोटर लिस्ट का मुद्दा: उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर वैध बंगाली मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश की जा रही है, जिसे वह सफल नहीं होने देंगी।

एकता का संदेश: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बंगाल सभी धर्मों और भाषाओं का सम्मान करता है, लेकिन बांग्ला भाषा का अपमान करने वालों को जनता चुनाव में जवाब देगी।

भाषा को बनाया हथियार: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी 2026 के चुनाव में 'बाहरी बनाम बंगाली' के नैरेटिव को और मजबूत कर रही हैं, जो पिछले चुनावों में उनके लिए काफी सफल रहा था।

केंद्र को चेतावनी: उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि संघीय ढांचे में किसी भी राज्य की मातृभाषा और वहां के नागरिकों के सम्मान से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

ममता बनर्जी के इस बयान ने भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। जहाँ भाजपा इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है, वहीं टीएमसी इसे राज्य की सांस्कृतिक रक्षा का नाम दे रही है। 2026 के चुनावों में 'भाषा' एक निर्णायक मुद्दा बनने की ओर अग्रसर है।

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