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महाशिवरात्रि 2026: शिव-शक्ति के मिलन का महापर्व, जानें महत्व, पौराणिक कथा और पूजन की महिमा...

Vichar RRT News Desk 13 February 2026 (10)

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प्रस्तावना सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का उत्सव है। इस पावन दिन भक्त उपवास रखकर देवाधिदेव महादेव की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। शिवपुराण के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शिव 'अग्निलिंग' के रूप में प्रकट हुए थे। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह रात्रि ऊर्जा के ऊर्ध्वगामी प्रवाह की होती है, जो मनुष्य के अंतर्मन की शुद्धि और आत्म-साक्षात्कार के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।

अमृत मंथन और नीलकंठ की कथा महाशिवरात्रि से जुड़ी एक प्रमुख कथा समुद्र मंथन की है। जब मंथन से 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला, तो पूरी सृष्टि विनाश के कगार पर थी। तब महादेव ने जगत की रक्षा के लिए उस विष को स्वयं पी लिया और उसे अपने कंठ में ही रोक लिया। विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया, जिससे वे 'नीलकंठ' कहलाए। देवताओं ने शिव जी को विष के प्रभाव से बचाने और उन्हें जगाए रखने के लिए रात भर नृत्य और भजन किए, जिसे आज हम महाशिवरात्रि के रूप में उत्साहपूर्वक मनाते हैं।

शिकारी और बेलपत्र की प्रेरणादायी कहानी एक अन्य प्रचलित कथा एक शिकारी की है, जो अनजाने में एक बेल के वृक्ष पर बैठकर शिकार का इंतजार कर रहा था। भूख और प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो सीधे वहां स्थित शिवलिंग पर गिर रहे थे। उसके इस अनजाने उपवास और समर्पण से प्रसन्न होकर महादेव ने उसे दर्शन दिए और मोक्ष प्रदान किया। यह कथा दर्शाती है कि सच्चे मन से की गई पूजा शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है।

पूजा विधि और विशेष अनुष्ठान महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त 'चार प्रहर' की विशेष पूजा करते हैं। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भक्त दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण यानी पंचामृत से महादेव का स्नान कराते हैं। शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' के जाप और शिव चालीसा के पाठ से घर और मन का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

ज्योतिर्लिंगों का दर्शन और महिमा भारत के विभिन्न कोनों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों, जैसे सोमनाथ, काशी विश्वनाथ और महाकालेश्वर में इस दिन भक्तों का सैलाब उमड़ता है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर इन पवित्र स्थानों के दर्शन मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है।

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