उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि 2026 को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है। इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव नवरात्रि का विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें भगवान महाकाल नौ दिनों तक दूल्हे के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इस अनूठी परंपरा के तहत मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।
नौ दिन अलग-अलग स्वरूप में होंगे महाकाल के दर्शन
शिव नवरात्र के दौरान प्रतिदिन बाबा महाकाल का अलग-अलग रूप में श्रृंगार किया जाएगा। कभी उन्हें राजसी दूल्हे के स्वरूप में सजाया जाएगा तो कभी पारंपरिक वैदिक श्रृंगार से अलंकृत किया जाएगा। फूलों, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष और आभूषणों से सजे महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे।
पूजा-अर्चना का बदला हुआ रहेगा क्रम
नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर की दिनचर्या विशेष रहेगी। भस्म आरती, अभिषेक, भोग और संध्या आरती के दौरान विशेष मंत्रोच्चार और वैदिक विधियों से पूजा संपन्न होगी। इस दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और पुष्प सज्जा से सजाया जाएगा।
श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर प्रशासन सतर्क
महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने व्यवस्थाओं की तैयारी शुरू कर दी है। दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने, सुरक्षा बढ़ाने और भक्तों की सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। शिव नवरात्र में महाकाल का दूल्हा स्वरूप इस परंपरा को जीवंत करता है। श्रद्धालु उपवास, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करेंगे।








