छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत कुरूद के जी-जमगांव स्थित माँ मातंगी दिव्य धाम में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। 'राष्ट्रीय गौरव रथ' के आगमन पर यहाँ एक विशाल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी पल का साक्षी बनने के लिए क्षेत्र के लगभग 25 हजार से अधिक श्रद्धालु एकत्रित हुए, जिससे पूरा परिसर भक्ति और राष्ट्रप्रेम के जयघोष से गूंज उठा। धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साई जी महाराज के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक चेतना के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त संदेश दिया।
आयोजन के दौरान डॉ. प्रेमा साई जी महाराज ने मीडिया से मुखातिब होते हुए हिंदू जागरण और सांस्कृतिक समरसता पर बल दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से एक महत्वपूर्ण अपील की कि प्रदेश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भारतीय महापुरुषों की जीवनी और उनके संघर्षों को शामिल किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के बलिदान से प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि माँ मातंगी धाम (त्रिकाल दर्शी धाम) केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए भी संकल्पित है।
समारोह का शुभारंभ शाम 5 बजे राष्ट्रीय गौरव रथ के विधिवत पूजन और आरती के साथ हुआ। इसके बाद निकाली गई भव्य शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। देर रात 11 बजे तक चले इस कार्यक्रम में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। छावा भारत क्रांति मिशन द्वारा आयोजित यह रथयात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों को समर्पित है, जो नासिक से शुरू होकर जगन्नाथ पुरी तक की दूरी तय कर रही है। कुरूद में हुआ यह स्वागत इसी राष्ट्रव्यापी अभियान का एक प्रमुख पड़ाव बना।
गौरतलब है कि 14 फरवरी को नासिक से प्रारंभ हुई यह यात्रा विभिन्न राज्यों से होते हुए 19 फरवरी को जगन्नाथ पुरी पहुँची, जहाँ अंतरराष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव का आयोजन हुआ। माँ मातंगी धाम में आयोजित इस स्वागत समारोह ने न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाया, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। आयोजकों और स्थानीय नागरिकों ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ की पावन धरा के लिए एक अविस्मरणीय और गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।








