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छत्तीसगढ़ में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती: LHV के लिए 15-चरणों वाला व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में पहली बार महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों (LHV) के लिए एक व्यापक राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और राज्य स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान (SIHFW) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है और इसे 15 चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें प्रदेश भर की सभी LHV को आधुनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल और प्रबंधन तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा।

क्यों है यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण?
स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस पहल को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 'मील का पत्थर' बताया है। उनके अनुसार, महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक (LHV) समुदाय और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच एक मज़बूत कड़ी हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उनके कौशल को आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट करना है, ताकि न केवल सेवाओं की गुणवत्ता बढ़े, बल्कि राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लक्ष्य को भी गति मिल सके।
"LHV मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। उनके कौशल को आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट करना आवश्यक है।"
- वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी
प्रशिक्षण का मुख्य फोकस: RMNCH
प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र RMNCH (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य) है। इसमें शामिल प्रमुख मॉड्यूल इस प्रकार हैं:
ANC (Antenatal Care): नवीनतम दिशा-निर्देशों पर गहन समझ।
उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP): प्रारंभिक पहचान, प्रबंधन और समय पर रेफरल की उन्नत तकनीकें।
PMSMA कार्यक्रम: गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सेवाएं।
प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल।
नवजात और शिशु देखभाल के आधुनिक प्रोटोकॉल।
संक्रमण नियंत्रण की उन्नत विधियां।
प्रभावी रेफरल समन्वय और हेल्थ सिस्टम के भीतर नेतृत्व क्षमता।
???? अनुभव आधारित शिक्षण पर जोर
यह कार्यक्रम पूरी तरह से अनुभव आधारित बनाया गया है। LHV को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं, बल्कि केस स्टडी, समूह चर्चा, रोल-प्ले और व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास कराया जा रहा है। इस दौरान उन्हें अपनी दैनिक चुनौतियों को साझा करने और उनका समाधान तलाशने का भी अवसर मिल रहा है।
प्रशिक्षण में टीम प्रबंधन, संचार कौशल, समुदाय से संवाद और संकट प्रबंधन से जुड़े सत्रों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है, ताकि LHV एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में अपने क्षेत्र में कार्य कर सकें।
???? शुभारंभ सत्र में जुटे वरिष्ठ अधिकारी
कार्यक्रम का शुभारंभ एक विशेष सत्र के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त-सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. एस. के. पामभोई, यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह और WHO प्रतिनिधि सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
✨ प्रतिभागियों में बढ़ा आत्मविश्वास
प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक प्रस्तुतिकरण आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने इसे अपने करियर और समुदाय दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कई LHV ने कहा कि, अब वे उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान और प्रबंधन में अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प भी लिया।
अधिकारियों को विश्वास है कि इस व्यापक प्रशिक्षण के बाद राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







