रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। प्रदेश की राजस्व सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और पेपरलेस बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने राज्य के 20 हजार से अधिक गांवों की भूमि का पूरा डाटा ऑनलाइन कर दिया है। इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से अब भू-माफियाओं और फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने वालों के मंसूबों पर पूरी तरह से पानी फिर जाएगा।
इस नई और आधुनिक तकनीक के तहत अब जमीन मालिकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष मोबाइल अलर्ट सिस्टम भी तैयार किया गया है। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ के पंजीकृत किसानों और भूमि स्वामियों को इस सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। यदि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की भूमि के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने, फर्जी रजिस्ट्री कराने या खसरा नंबर में बदलाव करने की कोशिश करेगा, तो असली जमीन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत एक सुरक्षा अलर्ट (एसएमएस) पहुंच जाएगा। इससे समय रहते धोखाधड़ी को पकड़ा और रोका जा सकेगा।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल सुधार का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर काटने और बिचौलियों के चंगुल से बचाना है। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे ही अपनी जमीन का पूरा ब्योरा ऑनलाइन देख और सत्यापित कर सकता है। सरकार के इस जनहितकारी कदम से न केवल रियल एस्टेट सेक्टर और जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि बरसों से चले आ रहे भूमि विवादों और अदालती मुकदमों की संख्या में भी भारी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।








