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झीरम कांड पर नड्डा के 'इनसाइडर' वाले बयान से उबाल, भूपेश बघेल ने की NIA जांच की मांग....

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में झीरम घाटी हमले को लेकर एक बार फिर भीषण जुबानी जंग छिड़ गई है। जांजगीर-चांपा में 'जनादेश परब' रैली के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। नड्डा ने कहा कि 2013 के झीरम कांड की अंदरूनी जानकारी कांग्रेस के ही कुछ लोगों ने नक्सलियों को दी थी ताकि वे अपने ही नेताओं को मरवा सकें। उन्होंने दावा किया कि वे उस समय छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी थे और उन्होंने घटना को बहुत करीब से देखा था।

नड्डा के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे 'शहीदों का अपमान' करार दिया है। बघेल ने मांग की है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) को तुरंत जेपी नड्डा से पूछताछ करनी चाहिए और उनके दावों के सबूत मांगने चाहिए। उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और वह साजिशकर्ताओं का पता लगाने की कोशिश कर रही थी, तब भाजपा ने अदालतों में याचिकाएँ लगाकर जांच को क्यों रुकवाया?
नड्डा ने रैली में यह भी दावा किया कि पीएम मोदी और सीएम विष्णु देव साय की 'डबल इंजन' सरकार के तहत छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद मार्च 2026 तक पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 2,500 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और माडवी हिड़मा जैसे बड़े कमांडर मारे गए हैं। नड्डा ने पिछली कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों के साथ 'दोस्ती और समझौते' की नीति अपनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने नड्डा के बयान को "राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ" बताते हुए माफी की मांग की है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि झीरम के पीड़ित परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं और ऐसे बिना सबूत वाले बयान उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि नड्डा के पास कोई जानकारी है, तो उन्हें इसे जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए न कि चुनावी रैलियों में इसका राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहिए।
25 मई 2013 को हुए इस नक्सली हमले में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा सहित 32 लोग मारे गए थे। 12 साल बाद भी यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। अब जेपी नड्डा के ताजा दावों ने इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है।







