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जशपुर में 6.55 करोड़ का धान घोटाला: फर्जी खरीदी और हेराफेरी का खुलासा, जिम्मेदारों पर गिरी गाज

Chhattisgarh RRT News Desk 06 January 2026

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ धान खरीदी प्रक्रिया में लगभग 6.55 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। सरकारी धान खरीदी केंद्रों पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान पाया गया कि कागजों पर जितनी धान खरीदी दिखाई गई थी, असल में गोदामों में उतना स्टॉक मौजूद ही नहीं था। इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया है।

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प्रशासनिक जांच के अनुसार, यह घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। कुछ खरीदी केंद्रों के प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने मिल-भगत कर फर्जी किसानों के नाम पर धान की एंट्री कर दी और सरकारी राशि का गबन कर लिया। जब उच्चाधिकारियों ने मिलान किया, तो करोड़ों रुपये का अंतर पाया गया। कलेक्टर के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने पाया कि कई केंद्रों पर धान का शॉर्टेज है, जिसे 'सूखत' या अन्य तकनीकी कारणों के पीछे छिपाने की कोशिश की गई थी।

इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित समिति प्रबंधकों और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। अब तक की जांच में कई समितियों के नाम सामने आए हैं जहाँ करोड़ों रुपये के धान का हिसाब नहीं मिल रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। साथ ही, गबन की गई राशि की वसूली के लिए दोषियों की संपत्तियों की जांच भी की जा सकती है।

राज्य सरकार ने धान खरीदी में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए थे, लेकिन जशपुर की इस घटना ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। बताया जा रहा है कि फर्जी गिरदावरी और बिचौलियों के जरिए भी इस घोटाले को हवा दी गई। किसानों के नाम का उपयोग कर अवैध तरीके से धान खपाने और सरकारी धन को हड़पने के इस खेल में कई बड़े चेहरों के शामिल होने का संदेह है। जांच का दायरा अब अन्य पड़ोसी केंद्रों तक भी बढ़ाया जा सकता है।

फिलहाल, प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। इस खुलासे के बाद जिले के सभी खरीदी केंद्रों का दोबारा ऑडिट किया जा रहा है ताकि गबन की सटीक राशि और दोषियों की पहचान पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

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