दुर्ग। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की 'सुशासन योजना' के तहत अधिकारियों की मनमानी और जनप्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार पर एक बड़ा और कड़ा एक्शन देखने को मिला है। दुर्ग जिले के थनौद गांव में आयोजित एक जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेता के साथ विवाद करना और उन्हें उंगली दिखाना जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश पांडे को भारी पड़ गया। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह के त्वरित प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) ने सीईओ रूपेश पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है।
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। सीएम साय ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनता की समस्याओं के निवारण के लिए लगाए जा रहे शिविरों में या किसी भी शासकीय कार्य में जनप्रतिनिधियों और आम जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वाले किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या अहंकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, थनौद में आयोजित शिविर में आम जनता की शिकायतों और क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर बीजेपी नेता और जनपद सीईओ रूपेश पांडे के बीच बहस शुरू हुई थी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अधिकारी मर्यादा भूल गए और उन्होंने बीजेपी नेता को उंगली दिखाते हुए तीखी बहस की, जिसका वीडियो और शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। कलेक्टर के निर्देश पर हुई प्राथमिक जांच के बाद इसे पदीय गरिमा के विपरीत और गंभीर अनुशासनहीनता माना गया, जिसके बाद निलंबन की यह बड़ी गाज गिरी है। निलंबन अवधि में सीईओ का मुख्यालय जिला पंचायत कार्यालय नियत किया गया है।







