जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में एक ऐसी घटना घटी है जिसने विज्ञान और समझ से परे 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' की कहावत को सच कर दिखाया है। यहाँ एक खूंखार बंदर ने घर के आंगन में बैठी मां की गोद से उसकी नन्हीं मासूम बच्ची को झपट्टा मारकर छीन लिया और भागते हुए उसे पास के एक गहरे कुएं में गिरा दिया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; घंटों पानी में रहने के बाद भी बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मां की आंखों के सामने काल बनकर आया बंदर
घटना जांजगीर के एक ग्रामीण इलाके की है। बताया जा रहा है कि महिला अपने घर के आंगन में अपनी कुछ माह की बच्ची को गोद में लेकर बैठी थी। तभी अचानक एक बंदर वहां पहुंचा और पलक झपकते ही बच्ची पर झपट्टा मारा। मां जब तक कुछ समझ पाती, बंदर बच्ची को लेकर ऊंचे बाड़े और छतों पर चढ़ गया। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े, लेकिन डर के मारे बंदर ने बच्ची को सीधे 20 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया और खुद फरार हो गया।
ममता की पुकार और जांबाज ग्रामीण
बच्ची के कुएं में गिरते ही वहां कोहराम मच गया। कुआं काफी गहरा था और उसमें काफी पानी भी था। ग्रामीणों ने बिना देर किए कुएं में छलांग लगाई। हर कोई मान चुका था कि इतनी ऊंचाई से गिरने और गहरे पानी में डूबने के बाद बच्ची का बचना नामुमकिन है। लेकिन जैसे ही एक युवक ने पानी के भीतर से बच्ची को बाहर निकाला, उसकी धड़कनें चल रही थीं। बच्ची को तुरंत बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया।
डॉक्टर भी हैरान: मौत को छूकर आई मासूम
मासूम को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की। डॉक्टरों के मुताबिक, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद बच्ची को कोई गंभीर आंतरिक चोट नहीं आई और पानी में रहने के बावजूद वह सुरक्षित है। फिलहाल बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
इलाके में बंदरों का आतंक, दहशत में ग्रामीण
इस घटना ने जहां एक ओर खुशी का माहौल बनाया है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। पिछले कुछ समय से इलाके में बंदरों का उत्पात काफी बढ़ गया है। लोग अपने घरों के बाहर निकलने और बच्चों को अकेला छोड़ने में डर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इन हमलावर बंदरों को पकड़कर सुरक्षित घने जंगलों में छोड़ा जाए।

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