बस्तर अंचल में कथित रूप से विदेशी फंड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज हो गई है। हालिया जांच में एक चौंकाने वाला 'बस्तर कनेक्शन' सामने आया है, जहाँ अमेरिकी मिशनरियों से प्राप्त धन का उपयोग कथित तौर पर चर्चों के निर्माण के लिए किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उन इलाकों में इन पक्की इमारतों को लेकर है, जहाँ आज भी स्थानीय आदिवासी समुदाय बुनियादी सुविधाओं से वंचित है और कच्चे घरों (झोपड़ियों) में रहने को मजबूर है।
कच्चे घरों और आलीशान चर्चों का विरोधाभास
जांच में यह बात सामने आई है कि जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ लोग गरीबी और अभाव में जी रहे हैं, वहां अचानक से पक्के और आलीशान चर्चों का निर्माण किया गया है। ईडी की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
फंड का स्रोत: क्या यह पैसा विदेशी चंदे के नियमों (FCRA) का पालन करते हुए आया है?
उपयोग की दिशा: क्या यह फंड सेवा कार्य के लिए था या धर्मांतरण और धार्मिक गतिविधियों के विस्तार के लिए इसका इस्तेमाल किया गया?
संपत्ति निर्माण: इन आलीशान निर्माणों के पीछे की वास्तविक फंडिंग और मालिकाना हक किसका है।
आदिवासी क्षेत्रों पर एजेंसियों की नजर
बस्तर में चल रहे इस जांच चक्र को काफी संवेदनशील माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी इन निर्माणों को लेकर लंबे समय से चर्चाएं रही हैं, लेकिन ईडी की सक्रियता के बाद अब आर्थिक पहलुओं की भी गहन पड़ताल शुरू हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब यह भी खंगाल रही है कि क्या इस विदेशी फंड के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है जो स्थानीय जनसांख्यिकी और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
जांच का अगला कदम
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों, लेन-देन के विवरण और संपत्तियों के दस्तावेजों को जब्त किया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई संस्थाओं के पदाधिकारियों और फंड ट्रांसफर करने वालों से पूछताछ की जा सकती है। यह मामला बस्तर के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस का केंद्र बन गया है।







