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उद्योगों के साथ हरित छत्तीसगढ़ की पहल: मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- पौधे लगाना नहीं, उन्हें बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर, 12 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। रायपुर के बेबीलॉन कैपिटल में आयोजित बैठक में मानसून-2026 के दौरान चल रहे वृक्षारोपण अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई और उद्योगों को हरित विकास के लिए अहम निर्देश दिए गए।

मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलेंगे तथा पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने उद्योगों से कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। स्थानीय और देशी प्रजातियों जैसे पीपल, नीम, आम, कटहल और शिरीष के अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी उद्योग 31 जुलाई तक अपने वृक्षारोपण लक्ष्य को पूरा करें और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित करें। वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी और सभी औद्योगिक इकाइयों को समयबद्ध तरीके से पोर्टल पर जानकारी दर्ज करनी होगी।
मंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित किया जा रहा है। आगामी पांच वर्षों में यहां एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाए जाएंगे। वहीं सेंध (Sendh) लेक के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो चुका है, जहां मियावाकी तकनीक से लगभग 25 हजार पौधे लगाकर बर्ड आइलैंड विकसित किया जा रहा है।
पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद ने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 90 प्रतिशत है। राज्य का लक्ष्य 25 लाख पौधरोपण का है, जिसे उद्योगों के सहयोग से 30 लाख तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित करे तथा प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए। साथ ही सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल के उपयोग और ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली को नियमित रूप से संचालित रखने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।







