RRT News बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर सामने आई है। लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद, बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) एक बार फिर पर्यटकों के लिए पूरी तरह खुलने जा रहा है। माओवादी गतिविधियों और सुरक्षा कारणों से पिछले 30 सालों से यह रिजर्व पर्यटन के नक्शे से लगभग ओझल था, लेकिन अब शासन-प्रशासन के प्रयासों से यहां फिर से सैलानियों की चहल-पहल शुरू होगी। ईको-टूरिज्म की इस पहल से न केवल बस्तर की नकारात्मक छवि बदलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता और दुर्लभ जंगली भैंसों (वनभैंसा) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 30 साल पहले यह इलाका पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र हुआ करता था, लेकिन अशांति के दौर ने इसे बंद करने पर मजबूर कर दिया था। अब यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और नए कैंपों की स्थापना के बाद, वन विभाग ने इसे दोबारा शुरू करने का मास्टर प्लान तैयार किया है। ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट के तहत पर्यटकों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल और बस्तरिया संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा, जिससे बीजापुर की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रिजर्व के भीतर सफारी ट्रैक को दुरुस्त किया जा रहा है और पर्यटकों के ठहरने के लिए नेचर कैंप और ईको-रिसॉर्ट्स विकसित किए जा रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों को गाइड और हॉस्पिटैलिटी की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे पर्यटन से सीधे जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में शांति बहाली को बल मिलेगा और दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमी फिर से इंद्रावती की वादियों और बाघों की दहाड़ का अनुभव कर पाएंगे।
बीजापुर जिले की तस्वीर बदलने वाला यह कदम 'बुलेट से टूरिज्म' की ओर बढ़ते बदलाव का प्रतीक है। राज्य सरकार का मानना है कि ईको-टूरिज्म के जरिए जब बाहर से लोग यहां आएंगे, तो स्थानीय हस्तशिल्प और कला को भी ग्लोबल पहचान मिलेगी। इंद्रावती टाइगर रिजर्व का पुनर्जीवित होना न केवल संरक्षण के नजरिए से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि बस्तर अब डर और आतंक के साये से बाहर निकलकर विकास की नई उड़ान भरने के लिए तैयार है।








