इंदौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। इलाके में बीते कई दिनों से उल्टी-दस्त, बुखार और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई मरीजों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराने के बजाय निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों में सप्लाई हो रहा पानी बदबूदार और गंदा है। कई परिवारों ने शिकायत की कि नलों से निकलने वाला पानी पीने योग्य नहीं है, इसके बावजूद लंबे समय तक सप्लाई बंद नहीं की गई। इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए।
निजी अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन अधिकतर गंभीर मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकारी अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर निजी अस्पतालों का खर्च भारी पड़ रहा है, जिससे नाराजगी भी बढ़ रही है।
लोगों में आक्रोश
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि समय रहते पानी की जांच और पाइपलाइन की मरम्मत नहीं की गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने लापरवाही बरती, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए।
प्रशासन की सफाई
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पानी की सप्लाई सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं और बीमार लोगों का इलाज प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। साथ ही दूषित पानी के स्रोत की जांच कर समस्या के स्थायी समाधान की बात कही जा रही है।
फिलहाल भागीरथपुरा में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। लोगों को साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार है, वहीं यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।








