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इंदौर में 'उल्टी-दस्त' के प्रकोप के बाद जागा प्रशासन: शहर के कई इलाकों में लिए जा रहे पानी के सैंपल, दूषित सप्लाई रोकने के लिए विशेष चेकिंग

मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी के कारण उल्टी और दस्त (Diarrhea) के बढ़ते मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इंदौर में हुई इस घटना से सबक लेते हुए, अब नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने शहर के विभिन्न मोहल्लों में पानी के नमूनों (Water Samples) की व्यापक टेस्टिंग शुरू कर दी है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य संक्रमण के स्रोत का पता लगाना और दूषित जल की सप्लाई को तत्काल रोकना है।

नगर निगम की टीमें उन बस्तियों और कॉलोनियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं, जहाँ से संक्रमण की शिकायतें सबसे ज्यादा मिली हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज या सीवरेज लाइन के साथ क्रॉस-कनेक्शन होने के कारण पीने का पानी दूषित हो जाता है। इस खतरे को कम करने के लिए प्रशासन न केवल वाटर सैंपलिंग कर रहा है, बल्कि पाइपलाइन नेटवर्क का 'प्रेशर टेस्ट' भी कर रहा है ताकि जमीन के भीतर छिपे लीकेज का पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि जब तक जांच की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक वे पानी को उबालकर ही पिएं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त या पेट में दर्द की शिकायत होती है, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि जल जनित बीमारियां (Waterborne Diseases) तेजी से फैलती हैं, इसलिए स्वच्छता और शुद्ध जल के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही के कारण पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई या अवैध कनेक्शन के जरिए गंदगी पानी में मिली, तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। महापौर और निगमायुक्त खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि शहरवासियों को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।







