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विदेश यात्रा पर 'वीजा संकट': भारतीयों को क्यों नहीं मिल पा रहे वीजा? अमेरिका-कनाडा के सख्त नियमों ने बढ़ाई टेंशन, सामने आई ये बड़ी वजह..

विदेश जाकर पढ़ाई करने या नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीयों को नए साल में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका, कनाडा और कई यूरोपीय देशों ने अपनी वीजा प्रक्रियाओं को इतना सख्त कर दिया है कि अब योग्य उम्मीदवारों को भी रिजेक्शन का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट की सबसे चौंकाने वाली वजह 'सोशल मीडिया वेटिंग' (Social Media Vetting) और सुरक्षा जांच के कड़े नियम बनकर उभरे हैं। अमेरिका ने अब वीजा आवेदकों के पिछले कई वर्षों के सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल एक्टिविटी की गहन जांच शुरू कर दी है, जिससे प्रोसेसिंग समय महीनों आगे बढ़ गया है।

अमेरिका की बात करें तो H-1B और स्टूडेंट वीजा के लिए इंटरव्यू की तारीखें अब 2026 के अंत और 2027 तक खिसक गई हैं। अमेरिकी दूतावास अब आवेदकों की 'एंटी-अमेरिकन' भावनाओं या किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की बारीकी से जांच कर रहा है। इसके कारण अमेज़न और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के भारतीय कर्मचारी भी भारत में फंस गए हैं, जिन्हें कंपनियां अब मार्च 2026 तक 'रिमोट वर्क' की अनुमति देने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'इमिग्रेशन क्रैकडाउन' विदेशी टैलेंट को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
वहीं, कनाडा में स्थिति और भी गंभीर है। वहां करीब 10 लाख भारतीयों पर अपना लीगल स्टेटस खोने का खतरा मंडरा रहा है। 2025 के अंत तक लाखों वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं और 2026 में करीब 9 लाख और परमिट खत्म होने वाले हैं। कनाडा सरकार ने अस्थायी निवासियों की संख्या सीमित करने के लिए नियमों को इतना कड़ा कर दिया है कि नए वीजा मिलना तो दूर, पुराने वीजा का विस्तार (Extension) भी नामुमकिन सा हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कई अवैध हो चुके प्रवासी अब जंगलों में तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।
वीजा रिजेक्शन की कुछ अन्य प्रमुख वजहें जो 2026 में सामने आई हैं:
वित्तीय पारदर्शिता: बैंक स्टेटमेंट में अचानक जमा की गई बड़ी रकम पर दूतावास अब 'सोर्स ऑफ फंड' की कड़ी जांच कर रहे हैं।
दस्तावेजों की सत्यता: फर्जी ऑफर लेटर और अनुभव प्रमाण पत्रों के खिलाफ एम्बेसी ने AI-आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया है।
वापसी का पुख्ता प्रमाण: अगर आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि वह यात्रा के बाद भारत जरूर लौटेगा, तो वीजा तुरंत खारिज किया जा रहा है।
इस 'वीजा लॉकडाउन' जैसी स्थिति ने न केवल छात्रों और पेशेवरों को परेशान किया है, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी भारी चपत लगाई है। ट्रैवल एजेंटों के अनुसार, अब भारतीयों का रुझान उन देशों की तरफ बढ़ रहा है जो 'वीजा-फ्री' या 'वीजा-ऑन-अराइवल' की सुविधा दे रहे हैं। यदि अमेरिका और कनाडा जैसी महाशक्तियों ने अपनी नीतियों में ढील नहीं दी, तो 2026 भारतीय प्रतिभाओं के पलायन के बजाय 'घर वापसी' का साल साबित हो सकता है।







