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आईआईटी भिलाई में 'ट्राइबोलॉजी' पर महाकुंभ: 13वीं अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में जुटे दुनिया भर के वैज्ञानिक...

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के कुटेलाभाटा स्थित स्थाई परिसर में 13वीं अंतर्राष्ट्रीय इंडस्ट्रियल ट्राइबोलॉजी कांफ्रेंस (IndiaTrib-2025) का सफल आयोजन किया गया। 'मानवता के लिए ट्राइबोलॉजी' (Tribology for Mankind) थीम पर आधारित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में ऊर्जा, अंतरिक्ष, परिवहन और विनिर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घर्षण (Friction), टूट-फूट (Wear) और स्नेहन (Lubrication) के प्रबंधन पर गहन मंथन हुआ। इस सम्मेलन ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।

ट्राइबोलॉजी मूल रूप से दो सतहों के बीच होने वाली परस्पर क्रिया का विज्ञान है। औद्योगिक मशीनों में होने वाले घर्षण को कम करके न केवल मशीनों की उम्र बढ़ाई जा सकती है, बल्कि भारी मात्रा में ऊर्जा की बचत भी की जा सकती है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे आधुनिक नैनो-लुब्रिकेंट्स और नई सामग्रियों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम कर पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है।
इस आयोजन में अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप सहित दुनिया के विभिन्न देशों से 120 से अधिक डेलीगेट्स और प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 100 से अधिक शोध पत्र (Research Papers) प्रस्तुत किए गए, जिनमें बियरिंग्स की ट्राइबोलॉजी, वियर टेस्टिंग में नवाचार और लुब्रिकेंट्स के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों पर चर्चा की गई। आईआईटी भिलाई के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कांफ्रेंस को ट्राइबोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (TSI) का सहयोग प्राप्त था।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में औद्योगिक विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच सीधा संवाद हुआ। इसमें भिलाई स्टील प्लांट (BSP) जैसे बड़े उद्योगों के लिए ट्राइबोलॉजी के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने साझा किया कि कैसे घर्षण से होने वाली खराबी को समय से पहले पहचान कर महंगे ब्रेकडाउन से बचा जा सकता है। यह छत्तीसगढ़ के औद्योगिक बेल्ट के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक रहा।
कार्यक्रम के समापन पर सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों को पुरस्कृत किया गया। आईआईटी भिलाई के निदेशक ने इस अवसर पर कहा कि संस्थान ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश के औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार में निरंतर योगदान देता रहेगा। इस कांफ्रेंस ने युवा शोधकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों से सीखने और नेटवर्किंग करने का एक बेहतरीन मंच प्रदान किया।







