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Silent Killers: बंदूकों के शोर के बीच जमीन में छिपी 'अदृश्य मौत', 25 सालों में 1200+ धमाकों से दहला इलाका

Chhattisgarh RRT News Desk 29 March 2026

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Raipur: भले ही मोर्चे पर सीधी गोलीबारी और बंदूकों का शोर कम हो गया हो, लेकिन जमीन के नीचे दबे अदृश्य बारूद से जंग आज भी जारी है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, साल 2001 से लेकर मार्च 2026 तक के आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया है। इन 25 सालों में आईईडी (IED) ब्लास्ट की कुल 1,277 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो यह बताने के लिए काफी हैं कि खतरा अभी टला नहीं है, बल्कि उसने अपना रूप बदल लिया है।

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जमीन के नीचे बिछाए गए ये "प्रेशर आईईडी" सुरक्षाबलों की आवाजाही को रोकने और ग्रामीणों में खौफ पैदा करने के लिए लगाए गए थे। समय के साथ ये और भी घातक हो चुके हैं क्योंकि इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि हर साल औसतन दर्जनों बार इन विस्फोटों ने निर्दोष जिंदगियों और जांबाज जवानों को अपना निशाना बनाया है। हाल के वर्षों में तकनीक और एंटी-नक्सल ऑपरेशन्स के बावजूद, ये जमीन में दबे विस्फोटक एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

वर्तमान में, सुरक्षा एजेंसियां हाई-टेक डिटेक्टर्स और स्निफर डॉग्स की मदद से डी-माइनिंग (विस्फोटक हटाने) का अभियान चला रही हैं। हालांकि, जंगलों और दुर्गम रास्तों में छिपे ये बम अभी भी एक "टिकिंग टाइम बम" की तरह हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक जमीन का एक-एक इंच बारूद से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक इसे पूर्ण शांति नहीं माना जा सकता। यह जंग हथियारों से ज्यादा अब सावधानी और तकनीक की हो गई है।

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