महासमुंद। छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी विनय कुमार लंगेह एक बार फिर अपनी कार्यशैली, नवाचार और जनभागीदारी आधारित प्रशासनिक पहलों को लेकर सुर्खियों में हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा में आए लंगेह ने कोरिया से लेकर महासमुंद तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जरूरतों को समझते हुए कई ऐसी योजनाओं और अभियानों को आगे बढ़ाया, जिन्हें लोगों का व्यापक समर्थन मिला।
जल संरक्षण अभियान को मिली राष्ट्रीय पहचान
महासमुंद में कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व में चलाया गया जल संरक्षण अभियान विशेष रूप से चर्चा में रहा। अभियान में प्रशासन के साथ ग्रामीणों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया गया।
जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को केवल सरकारी योजना के रूप में लागू करने के बजाय उन्हें जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को मजबूत करने के साथ भविष्य के लिए जल संसाधनों का संरक्षण करना रहा।
1140 गांवों तक पहुंची प्रशासनिक पहल
महासमुंद जिले में करीब 1140 गांवों तक विकास और जनकल्याण से जुड़ी पहलों को पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों की भागीदारी को प्रशासनिक कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
लंगेह की कार्यशैली में तकनीक, नवाचार और जमीनी स्तर पर लोगों से संवाद को खास महत्व दिया गया। यही वजह है कि उनके नेतृत्व में शुरू किए गए कई अभियानों को व्यापक जनसमर्थन मिला।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से प्रशासनिक अधिकारी तक का सफर
विनय कुमार लंगेह का करियर भी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा का रास्ता चुना। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं और जमीनी स्तर पर काम करने का अनुभव हासिल किया।
कोरिया से लेकर महासमुंद तक उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान नवाचार और जनभागीदारी आधारित कार्यों को प्राथमिकता दी गई। महासमुंद में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों ने उनकी कार्यशैली को खास पहचान दिलाई।
जनभागीदारी को बनाया बदलाव का आधार
विनय कुमार लंगेह की प्रशासनिक शैली में जनभागीदारी को अहम स्थान दिया गया है। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव तभी स्थायी हो सकता है, जब स्थानीय लोग भी उसमें सक्रिय भागीदारी करें।
इसी सोच के साथ जल संरक्षण सहित विभिन्न अभियानों में ग्रामीणों, स्थानीय संस्थाओं और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया। इन पहलों से ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम हुआ।

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