देश में प्रशासनिक ढांचे को संभालने वाली सबसे अहम सेवा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), इस समय भारी कमी का सामना कर रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देशभर में करीब 1300 IAS अधिकारियों के पद खाली हैं, जिससे कई राज्यों में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, IAS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या लगभग 6800 से अधिक है, लेकिन वर्तमान में काफी पद खाली पड़े हैं। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ रहा है। �
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राज्यों की स्थिति देखें तो उत्तर प्रदेश और केरल जैसे बड़े राज्यों में अधिकारियों की कमी सबसे ज्यादा बताई जा रही है। कई जगहों पर एक ही अधिकारी को एक से अधिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं, जिससे काम का दबाव बढ़ रहा है और फैसलों में देरी हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि IAS अधिकारियों की कमी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सीमित भर्ती, बढ़ती प्रशासनिक जरूरतें और अधिकारियों का केंद्र में प्रतिनियुक्ति (deputation) पर जाना शामिल है। इसके अलावा नए जिलों और योजनाओं के बढ़ने से अधिकारियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस कमी का सीधा असर आम जनता पर भी पड़ रहा है। योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, फाइलों के लंबित रहने और प्रशासनिक निगरानी में कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने और अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है।








