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Holika Dahan 2026: 2 या 3 मार्च? भद्रा और चंद्र ग्रहण के साये में जानें कब जलेगी होली और क्या है शुभ मुहूर्त...

रायपुर: साल 2026 में होली का पर्व धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस बार 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने के कारण 'सूतक काल' मान्य होगा, जिससे शुभ कार्यों और दहन के समय में बड़ा बदलाव आया है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी, लेकिन भद्रा और ग्रहण के कारण सही मुहूर्त का चुनाव आवश्यक है।

3 मार्च को चंद्र ग्रहण और भद्रा का प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 2 मार्च की पूरी रात भद्रा का साया रहेगा, जो 3 मार्च की सुबह लगभग 5:30 बजे समाप्त होगा। वहीं 3 मार्च को ग्रहण का प्रभाव रहेगा:
चंद्र ग्रहण का समय: 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक।
सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी सुबह लगभग 6:23 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें पूजा-पाठ वर्जित होता है।
दृश्यता: भारत के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण खंडग्रास (Partial) और पूर्वोत्तर राज्यों में पूर्ण (Total) रूप में दिखाई देगा।
होलिका दहन का सबसे सटीक मुहूर्त
ग्रहण और भद्रा से मुक्त होकर होलिका दहन के लिए दो प्रमुख समय निकल रहे हैं:
3 मार्च (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 5:30 बजे (भद्रा समाप्त होने के बाद) से लेकर 6:23 बजे (सूतक शुरू होने से पहले) तक।
3 मार्च (शाम का मुहूर्त): शाम 6:47 बजे (ग्रहण समाप्त होने के बाद) से रात 8:50 बजे तक। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण शुद्धि के बाद शाम को दहन करना ही सबसे उत्तम माना जा रहा है।
4 मार्च को मनेगी धुलेंडी (रंगों वाली होली)
चूंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है और सूतक काल के कारण खुशियाँ मनाना या रंग खेलना वर्जित है, इसलिए पूरे देश में 4 मार्च 2026 (बुधवार) को रंगवाली होली या धुलेंडी का उत्सव मनाया जाएगा।






