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छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'नया दौर': क्या 2026 में बदल रहे हैं सत्ता और संगठन के समीकरण?

RRT News - रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत अब केवल नारों और वादों तक सीमित नहीं रह गई है। 2026 की दहलीज पर खड़े छत्तीसगढ़ में सत्ता और विपक्ष, दोनों ही अपने स्वरूप और शैली में बड़े बदलाव कर रहे हैं। जहाँ भाजपा 'सुशासन और सुरक्षा' के दम पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 'संगठन के कायाकल्प' में जुटी है।

1. भाजपा का 'मिशन 2026': नक्सलवाद का अंत और डिजिटल क्रांति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने दो बड़े लक्ष्य रखे हैं। पहला, जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाना और दूसरा, पूरे सरकारी कामकाज को 'पेपरलेस' कर डिजिटल गवर्नेंस को गांव-गांव तक पहुँचाना।
आर्थिक मोर्चे पर बढ़त: 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की GSDP में 8% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
कृषि कार्ड: 'कृषक उन्नति योजना' के जरिए किसानों को साधा जा रहा है, जो राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र रहे हैं।
2. कांग्रेस की 'नई रणनीति' और संगठन में बदलाव
लगातार हार के बाद कांग्रेस अब नए साल में नई ऊर्जा के साथ मैदान में है। पार्टी आलाकमान (राहुल-खड़गे) के दौरों और जिला अध्यक्षों की स्पेशल ट्रेनिंग से यह साफ है कि कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रही है।
3. राज्यसभा की 2 सीटें: शक्ति प्रदर्शन का नया अखाड़ा
अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें (फूलों देवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल समाप्त) खाली हो रही हैं। वर्तमान विधानसभा समीकरणों के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस के बीच इन सीटों को लेकर कड़ी जोर-आजमाइश तय है। यह चुनाव राज्य में विपक्षी एकता और सत्ता पक्ष के आत्मविश्वास का लिटमस टेस्ट साबित होगा।
4. उभरते राजनीतिक मुद्दे
नारी शक्ति: महतारी वंदन जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ी है।
युवा और रोजगार: नई औद्योगिक नीति (2024-2029) के तहत युवाओं को रोजगार से जोड़ना राजनीति का एक बड़ा फैक्टर बन गया है।
गुटबाजी की चुनौती: दोनों ही प्रमुख दलों के भीतर आंतरिक गुटबाजी और 'टिकट' की दावेदारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की राजनीति अब 'वेट एंड वॉच' की स्थिति से बाहर निकलकर आक्रामक मोड में आ गई है। 2028 के विधानसभा चुनावों की बुनियाद इसी साल रखी जा रही है। क्या भाजपा अपने विकास मॉडल से जनता का भरोसा बरकरार रख पाएगी, या कांग्रेस का नया संगठन उसे कड़ी टक्कर देगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।







