दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के दो वार्डों में पीलिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण एक दर्जन से अधिक लोग पीलिया की चपेट में आ गए हैं। मामला प्रकाश में आते ही स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन में खलबली मच गई है। स्वास्थ्य विभाग की विशेष डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित वार्डों में घर-घर जाकर सर्वे और मरीजों की जांच शुरू कर दी है। एहतियात के तौर पर संदिग्ध हैंडपंपों को सील कर दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 15 और 16 (गया नगर क्षेत्र) से लगातार पीलिया के लक्षण वाले मरीज सामने आ रहे थे। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से नलों और हैंडपंपों से मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा था, जिसकी शिकायत के बावजूद नगर निगम ने समय पर ध्यान नहीं दिया। अब जब बीमारी ने महामारी का रूप लेना शुरू किया है, तब प्रशासन की नींद टूटी है। स्वास्थ्य टीम ने प्रभावित घरों से पानी के सैंपल लिए हैं और मरीजों के रक्त के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।
दुर्ग कलेक्टर और निगम आयुक्त के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल 'मेडिकल कैंप' लगा दिया है। डॉक्टरों की टीम ने अब तक 200 से अधिक घरों का सर्वे किया है। जांच के दौरान जिन हैंडपंपों के पानी में खराबी की आशंका थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी उबालकर ही पिएं। साथ ही, नगर निगम द्वारा टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
इस घटना ने नगर निगम की पाइपलाइन रख-रखाव प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुछ स्थानों पर ड्रेनेज (नाली) की पाइपलाइन और पेयजल की पाइपलाइन आपस में मिल गई है, जिससे शुद्ध पानी दूषित हो रहा है। विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दुर्ग के जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पीलिया एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जो दूषित जल और भोजन से फैलती है। यदि समय रहते पानी की पाइपलाइनों की मरम्मत नहीं की गई, तो यह प्रकोप शहर के अन्य वार्डों में भी फैल सकता है। प्रशासन ने अगले 48 घंटों तक सघन निगरानी रखने और वार्डों में क्लोरीन की गोलियां बांटने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन नए मामलों का आना अभी भी जारी है।








