सूरजपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में सुरक्षा और घुसपैठ को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के एक धान खरीदी केंद्र में हम्माली और मजदूरी कर रहे 8 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। ये सभी व्यक्ति बिना किसी वैध दस्तावेज के पिछले कुछ समय से केंद्र में काम कर रहे थे। धान खरीदी जैसे संवेदनशील सरकारी कार्य में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी ने स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सूरजपुर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि खरीदी केंद्र में काम कर रहे कुछ मजदूरों की भाषा और व्यवहार संदिग्ध है। पुलिस ने जब मौके पर पहुँचकर जांच की और उनसे पहचान पत्र मांगे, तो वे कोई भी वैध भारतीय दस्तावेज पेश नहीं कर सके। प्रारंभिक पूछताछ में उनके बांग्लादेशी होने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग किसी ठेकेदार के माध्यम से यहाँ काम करने पहुँचे थे, जिसने इनकी पहचान की पुष्टि किए बिना ही इन्हें काम पर रख लिया था।
इस घटना के बाद धान खरीदी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि ये संदिग्ध नागरिक सीमा पार कर छत्तीसगढ़ के इस अंदरूनी जिले तक कैसे पहुँचे और क्या इनके पीछे कोई बड़ा मानव तस्करी या घुसपैठ का गिरोह काम कर रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इन्होंने स्थानीय स्तर पर कोई जाली आधार कार्ड या राशन कार्ड बनवाने की कोशिश की थी।
सूरजपुर एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की है। पकड़े गए सभी 8 व्यक्तियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि उनके भारत आने के सही रास्ते और उनके स्थानीय मददगारों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने उस ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसने बिना पुलिस सत्यापन के इन लोगों को सरकारी कार्य में लगाया। इस खुलासे के बाद जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों और राइस मिलों में काम करने वाले बाहरी मजदूरों की सघन जांच शुरू कर दी गई है।
वर्तमान में सभी संदिग्धों को गुप्त स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है और उनकी नागरिकता की पुष्टि के लिए संबंधित दूतावास और केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क साधा जा रहा है। यदि उनके बांग्लादेशी होने की पुष्टि होती है, तो उन्हें विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत जेल भेजा जाएगा और निर्वासन (Deportation) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस घटना ने सीमावर्ती राज्यों से आने वाले मजदूरों के अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।








