कोरबा, छत्तीसगढ़: एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार SECL की गेवरा खदान एक बार फिर अशांत हो गई है। रविवार को कोयला लिफ्टिंग और वर्चस्व को लेकर दो निजी कंपनियों के कर्मचारियों के बीच खदान परिसर के भीतर ही हिंसक झड़प हो गई। यह पूरा विवाद CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के जवानों की मौजूदगी में हुआ, जिससे खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
विवाद की शुरुआत कोयला परिवहन को लेकर हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों गुटों के लोग लाठी-डंडों से लैस थे और एक-दूसरे पर हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कुछ समय के लिए कोयला लोडिंग का काम भी प्रभावित हुआ।
स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। दीपका थाना पुलिस ने इस मामले में कुल 12 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) प्रबंधन ने भी इस घटना पर संज्ञान लिया है। कंपनी के सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि खदान के भीतर निजी ठेका कंपनियों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की लड़ाई अक्सर इस तरह के तनाव का कारण बनती है।
वर्तमान में गेवरा खदान क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और CISF की गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि खदान के प्रतिबंधित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में लोग हथियारों (लाठी-डंडों) के साथ कैसे एकत्र हुए और सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें समय रहते क्यों नहीं रोका।








