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नदी की धारा रोककर बनाया 'निजी रास्ता': 10 KM की दूरी घटाने के लिए खड़ा कर दिया अवैध एनीकट, प्रशासन बेखबर....

Chhattisgarh RRT News Desk 05 January 2026

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रायपुर/धमतरी: विकास की आड़ में प्रकृति से खिलवाड़ और सरकारी नियमों को ताक पर रखने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक रसूखदार व्यक्ति या ठेकेदार ने अपनी निजी सुविधा के लिए पूरी की पूरी नदी के बीचों-बीच एक अवैध रास्ता (एनीकट नुमा संरचना) तैयार कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह अवैध निर्माण केवल इसलिए किया गया ताकि 10 किलोमीटर की दूरी को घटाया जा सके और नदी के दूसरी ओर से आसानी से मिट्टी व अन्य खनिज लाए जा सकें।

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स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नदी के बहाव को रोककर बनाए गए इस मलबे और पत्थरों के रास्ते के कारण जल स्तर और नदी की पारिस्थितिकी (Ecology) पर बुरा असर पड़ रहा है। रेत और मिट्टी के अवैध परिवहन को सुगम बनाने के लिए नदी की प्राकृतिक धारा को मोड़ दिया गया है। ताज्जुब की बात यह है कि इतना बड़ा निर्माण कार्य रातों-रात नहीं हुआ, फिर भी सिंचाई विभाग और खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

नियमों की सरेआम धज्जियां:

जल प्रवाह बाधित: नदी के बीचों-बीच मिट्टी और पत्थर डालने से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है, जिससे आने वाले मानसून में आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

मिट्टी की तस्करी: अवैध रास्ता बनाने का मुख्य उद्देश्य नदी के दूसरी ओर मौजूद खेतों या खदानों से मिट्टी की खुदाई कर उसे कम समय में गंतव्य तक पहुँचाना है।

पर्यावरण को क्षति: नदी के तल (River Bed) के साथ छेड़छाड़ करने से जलीय जीवों और भू-जल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इस मामले के उजागर होने के बाद अब प्रशासन की नींद टूटी है। स्थानीय राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना करने की बात कही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस अवैध रास्ते के बारे में कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन रसूखदारों के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जब मामला मीडिया की सुर्खियों में आया है, तो अधिकारी अवैध निर्माण को ढहाने और दोषियों पर जुर्माना लगाने की बात कह रहे हैं।

पर्यावरणविदों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि नदियों के साथ इसी तरह का खिलवाड़ जारी रहा, तो भविष्य में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। इस मामले में खनिज विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में है, क्योंकि बिना उनकी मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर मिट्टी और रेत का परिवहन संभव नहीं है।

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