रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के हजारों कारोबारियों और करदाताओं के लिए राहत भरी खबर है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के तहत लंबे समय से प्रतीक्षित GST अपीलीय अधिकरण (GSTAT) की छत्तीसगढ़ राज्य पीठ (Raipur Bench) जनवरी 2026 से क्रियाशील होने जा रही है। केंद्र सरकार ने रायपुर पीठ के लिए सदस्यों की नियुक्ति कर दी है, जिससे अब करदाताओं को वैट और जीएसटी से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए सीधे हाईकोर्ट जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
GSTAT की छत्तीसगढ़ पीठ के लिए प्रदीप कुमार व्यास को न्यायिक सदस्य और सतीश कुमार अग्रवाल को तकनीकी सदस्य (केंद्रीय) के रूप में नियुक्त किया गया है। ये नवनियुक्त सदस्य 21 जनवरी 2026 को अपना पदभार ग्रहण करेंगे। तकनीकी सदस्य (राज्य) के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। अधिकरण के अस्तित्व में आने से पहले, यदि कोई करदाता आयुक्त (अपील) के आदेश से असंतुष्ट होता था, तो उसे न्याय के लिए महंगे और समय लेने वाले हाईकोर्ट के मुकदमों का सामना करना पड़ता था।
अधिकरण के शुरू होने से न केवल न्याय सुलभ और सस्ता होगा, बल्कि विवादों का त्वरित निपटारा भी संभव हो सकेगा। अब तक हाईकोर्ट में तकनीकी जीएसटी मामलों के कारण बोझ काफी बढ़ गया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी हाल के फैसलों में करदाताओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक अपीलीय अधिकरण पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो जाता, तब तक करदाताओं के विरुद्ध दंडात्मक वसूली पर रोक रहेगी। यह छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए एक बड़ी सुरक्षा कवच की तरह है।
GSTAT एक विशेषज्ञ निकाय के रूप में कार्य करेगा, जिसके पास दीवानी न्यायालय (Civil Court) जैसी शक्तियां होंगी। यह अधिकरण साक्ष्य जुटाने, गवाहों को समन करने और दस्तावेजों की जांच करने में सक्षम होगा। इससे न केवल छत्तीसगढ़ में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कर कानूनों की व्याख्या में भी एकरूपता आएगी। व्यापारियों को अब अपनी बात रखने के लिए एक समर्पित और तकनीकी रूप से सक्षम मंच प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर में इस बेंच की स्थापना से लंबित हजारों मामलों का बोझ कम होगा। अधिकरण में अपील करने की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है, जिसे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरा किया जा सकेगा। यह कदम छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक समुदाय के लिए मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि अब कर संबंधी अनिश्चितताएं कम होंगी और विवादों का समाधान पेशेवर तरीके से हो सकेगा।








