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छत्तीसगढ़ को झकझोर देने वाली घटना: 10 साल की मासूम ने की खुदकुशी, वजह जानकर कांप जाएगी रूह

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। महज 10 साल की एक बच्ची ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और पढ़ाई के बीच अपना भविष्य बुनते हैं, उस उम्र में इस आत्मघाती कदम ने पुलिस और मनोवैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और हर कोई स्तब्ध है।

हैरान कर देने वाली वजह: मोबाइल और छोटी सी डांट बनी काल?
पुलिस की शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि:
मोबाइल की लत: बच्ची काफी समय मोबाइल गेमिंग या वीडियो देखने में बिताती थी।
परिजनों की टोक-टाक: घटना वाले दिन मां या पिता ने मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल करने पर उसे हल्की सी डांट लगाई थी और पढ़ाई करने को कहा था।
क्षणिक आवेश: डांट से नाराज होकर मासूम ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। परिजनों को लगा कि वह सो गई है या नाराज है, लेकिन जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला, तो खिड़की से झांकने पर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची पंखे के सहारे फंदे से झूल रही थी।
मनोवैज्ञानिकों की चेतावनी: बच्चों के व्यवहार पर रखें पैनी नजर
इस घटना ने 'डिजिटल एडिक्शन' और बच्चों में बढ़ती 'इम्पल्सिविटी' (अति-उत्साह या क्षणिक क्रोध) के खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल बच्चे मोबाइल की काल्पनिक दुनिया में इतने खो जाते हैं कि उन्हें असल जिंदगी की छोटी सी डांट भी असहनीय लगती है। सोशल मीडिया और रील कल्चर ने उनकी सहनशक्ति को कम कर दिया है।
पुलिस की अपील और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने मीडिया के माध्यम से अपील की है कि अभिभावक अपने बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें और उन्हें मोबाइल के बजाय आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा गुमसुम रहे या चिड़चिड़ा हो, तो तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लें। यह मामला छत्तीसगढ़ में बाल संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।







