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बिलासपुर में जल प्रलय: बांध का हिस्सा टूटने से मची तबाही, गांवों में घुसा सैलाब; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है। जिले के एक महत्वपूर्ण बांध (डैम) का एक हिस्सा अचानक टूट गया है, जिससे निचले इलाकों में स्थित दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। बांध का पानी इतनी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ा कि ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई घरों में पानी 4 से 5 फीट तक भर गया है, जिससे अनाज, कपड़े और कीमती सामान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।

प्रशासन अलर्ट: SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर तैनात
बांध टूटने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर और एसपी के निर्देश पर SDRF (राज्य आपदा मोचन बल) और स्थानीय पुलिस की टीमों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में रवाना किया गया है। मोटर बोट के जरिए फंसे हुए बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने आसपास के स्कूलों और सरकारी भवनों को राहत शिविरों में तब्दील कर दिया है, जहाँ विस्थापितों के लिए भोजन और दवाइयों की व्यवस्था की जा रही है।
फसलें बर्बाद, मवेशियों के बहने की आशंका
इस जल प्रलय ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज था कि कई मवेशी भी इसकी चपेट में आकर बह गए हैं। बिजली के खंभे गिरने से प्रभावित गांवों में ब्लैकआउट (अंधेरा) छा गया है, जिससे राहत कार्य में भी बाधा आ रही है।
जांच के घेरे में जल संसाधन विभाग: क्या रखरखाव में हुई चूक?
बांध के अचानक टूटने ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मानसून से पहले बांध की मरम्मत और ऑडिट किया गया था? ग्रामीणों का आरोप है कि बांध की दीवारों में लंबे समय से दरारें थीं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।







