राजधानी रायपुर में मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर निर्वाचन विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है, लेकिन इस प्रक्रिया ने लाखों नागरिकों की नींद उड़ा दी है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जिले के 5.42 लाख मतदाताओं के विवरण में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। यदि इन मतदाताओं ने आगामी 14 फरवरी तक अपने दस्तावेजों में सुधार नहीं कराया या निर्धारित सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, तो उनका नाम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। 21 फरवरी को अंतिम सूची का प्रकाशन होना है, जिससे पहले प्रशासन इस भारी भरकम गड़बड़ी को ठीक करने की जद्दोजहद में जुटा है।
इस 'संकट' की जद में आए मतदाताओं में से लगभग 4.22 लाख लोग ऐसे हैं जिनके नाम, उम्र, लिंग या पिता के नाम में त्रुटियां हैं। वहीं, करीब 1.33 लाख मतदाताओं के वर्तमान विवरण का मिलान वर्ष 2003 की ऐतिहासिक मतदाता सूची से नहीं हो पा रहा है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि फर्जी मतदान और दोहरी प्रविष्टियों को रोकने के लिए यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' जरूरी है। विभाग द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद अब तक बड़ी संख्या में लोग अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे हैं, जो एक बड़ी लोकतांत्रिक चुनौती बन गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 14 फरवरी के बाद किसी भी प्रकार का दावा या आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। जो मतदाता इस समय सीमा को चूक जाएंगे, उन्हें आगामी चुनावों में मतदान से वंचित होना पड़ सकता है। हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि अंतिम प्रकाशन के बाद नाम जुड़वाने का विकल्प खुला रहेगा, लेकिन वह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली होगी। वर्तमान में बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं, फिर भी डेटा मिलान न होने की स्थिति में नाम कटना लगभग तय माना जा रहा है।
यह खबर केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं, बल्कि रायपुर के हर जागरूक नागरिक के लिए एक चेतावनी है। मतदाता सूची में नाम होना न केवल आपका संवैधानिक अधिकार है, बल्कि आपकी नागरिक पहचान का सबसे बड़ा प्रमाण भी है। अपनी वोट की शक्ति को बचाने के लिए तुरंत अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क करें या निर्वाचन विभाग के पोर्टल पर अपने नाम की स्थिति की जांच करें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही 14 फरवरी के बाद आपको 'बेवोटर' बना दे।








