छत्तीसगढ़ भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने अपनी ही सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बार उनके निशाने पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर वी.के. भतपहरी हैं। कंवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी का कच्चा चिट्ठा खोला है। उन्होंने भतपहरी को तत्काल पद से हटाने और पूरे मामले की CBI (सीबीआई) जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
शिकायत में ननकीराम कंवर ने मुख्य तकनीकी परीक्षक की जांच का हवाला देते हुए बताया कि विभाग में 4.37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त और अनावश्यक खर्च किया गया है। सबसे चौंकाने वाला आरोप सरकारी दस्तावेजों और 'माप पुस्तिका' (Measurement Book) के गायब होने का है, जिसे लेकर उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मंत्री का कहना है कि इतने गंभीर मामले सामने आने के बावजूद अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जो व्यवस्था में गहरे तक पैठे भ्रष्टाचार का संकेत है।
इतना ही नहीं, ननकीराम कंवर ने विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया को भी संदिग्ध बताया है। उनका आरोप है कि दागी और विवादित अधिकारियों को बचाने और उन्हें प्रमोट करने के लिए नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के अलावा मुख्य सचिव विकासशील और पीडब्ल्यूडी सचिव कमलप्रीत सिंह को भी पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। यह 'लेटर बम' ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा कर रही है।
निकीराम कंवर अक्सर अपने ही दल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी उन्होंने डीएमएफ (DMF) फंड और पीएससी भर्ती में धांधली को लेकर आवाज बुलंद की थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कंवर की यह सक्रियता न केवल पीडब्ल्यूडी विभाग में खलबली मचाएगी, बल्कि सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्य का प्रशासनिक अमला इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।

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