छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस ने नक्सलवाद की कमर तोड़ने वाली एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। ओडिशा सीमा से सटे मैनपुर क्षेत्र की दुर्गम पहाड़ियों में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री के विशाल जखीरे को संयुक्त पुलिस बल ने बरामद कर लिया है। ई-30 ऑप्स टीम द्वारा चलाया गया यह 36 घंटे का विशेष सर्च ऑपरेशन माओवादियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इसमें न केवल हथियार बल्कि उनकी गुप्त 'टेक्निकल वर्कशॉप' का भी खुलासा हुआ है।
इस पूरी कार्रवाई की नींव हाल ही में मुख्यधारा में लौटे आत्मसमर्पित माओवादियों ने रखी। उनकी निशानदेही पर पुलिस को पता चला कि सीपीआई माओवादी की ओडिशा राज्य कमेटी ने भालूडिग्गी और मटाल की पहाड़ी श्रृंखलाओं में भविष्य के हमलों के लिए हथियारों और तकनीकी उपकरणों का बैकअप डम्प कर रखा है। रणनीति के तहत जंगल में उतरी पुलिस टीम ने छह अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी, जहाँ से 2 इंसास राइफल, 303 राइफल, देशी बीजीएल लॉन्चर और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
जंगलों के बीच छिपी इस गुप्त वर्कशॉप का खुलासा होने से यह स्पष्ट हो गया है कि माओवादी यहाँ न केवल हथियारों की मरम्मत कर रहे थे, बल्कि आईईडी जैसे घातक विस्फोटक तैयार करने की भी साजिश रच रहे थे। यह गतिविधियां संगठन के शीर्ष नेतृत्व की सीधी निगरानी में चल रही थीं। पुलिस की इस कार्रवाई ने नक्सलियों की 'स्ट्राइक कैपेसिटी' को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क अब पूरी तरह बिखरने की कगार पर है।
पिछले डेढ़ वर्षों से चल रहे "ऑपरेशन विराट" ने गरियाबंद में नक्सली हिंसा की संभावनाओं को न्यूनतम कर दिया है। वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड बताते हैं कि पुलिस अब तक 57 हथियार और 240 से अधिक डेटोनेटर जब्त कर चुकी है। गरियाबंद पुलिस की इस निरंतर आक्रामकता ने क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक माओवादी नेटवर्क का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, तब तक यह प्रहार जारी रहेगा।








