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छत्तीसगढ़ भाजपा की नई कार्यसमिति पर सस्पेंस बरकरार: कांग्रेस ने 'देरी' पर कसा तंज, भाजपा का पलटवार- 'विपक्ष पहले अपना घर संभाले'...
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छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद अब भाजपा संगठन में 'बदलाव' की सुगबुगाहट तेज है, लेकिन नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा में हो रही देरी ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। लंबे समय से नई कार्यकारिणी की राह ताक रहे कार्यकर्ताओं के बीच जहां बेचैनी है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे भाजपा की 'अंदरूनी कलह' करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के भीतर कई सत्ता केंद्र बन गए हैं, जिसके कारण तालमेल बैठाना मुश्किल हो रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा है कि जो पार्टी 'अनुशासन' की बात करती है, वह सरकार बनने के इतने महीनों बाद भी अपनी टीम तय नहीं कर पा रही है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा में पुराने और नए चेहरों के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है, जिसके चलते नामों पर अंतिम सहमति नहीं बन पा रही है। विपक्ष का यह भी कहना है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने के डर से सूची को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी 'हताशा' बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा एक विचार आधारित संगठन है, जहां हर निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उचित समय पर लिया जाता है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने बिखरते कुनबे और नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से होने वाले वाकयुद्ध की चिंता करनी चाहिए, न कि भाजपा के आंतरिक संगठनात्मक ढांचे की।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो भाजपा की इस नई कार्यसमिति में आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों की झलक देखने को मिल सकती है। चर्चा है कि पार्टी युवा ऊर्जा और अनुभवी मार्गदर्शकों के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि 'मिशन 2028' की नींव अभी से मजबूत की जा सके। फिलहाल, दिल्ली दरबार से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। अब देखना यह होगा कि भाजपा की यह नई टीम कब तक सामने आती है और क्या यह कांग्रेस के आरोपों का जवाब अपने काम से दे पाएगी।







