विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) ने फरवरी के पहले नौ कारोबारी सत्रों में 2 अरब डॉलर ($2 Billion) से अधिक मूल्य के शेयर खरीदे हैं। अकेले फरवरी के पहले हफ्ते में ही ₹8,100 करोड़ से ज्यादा का शुद्ध निवेश (Net Investment) दर्ज किया गया।
जनवरी का झटका: जनवरी 2026 में FIIs ने रिकॉर्ड ₹35,962 करोड़ की निकासी की थी।
फरवरी का यू-टर्न: 3 फरवरी को एक ही दिन में ₹5,236 करोड़ की बंपर खरीदारी हुई, जो पिछले कई महीनों का रिकॉर्ड है।
9 फरवरी का अपडेट: अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को भी विदेशी निवेशकों ने ₹2,223 करोड़ के शेयर खरीदे।
क्यों लौटे विदेशी निवेशक? (मुख्य कारण)
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: फरवरी की शुरुआत में हुई भारत-अमेरिका व्यापार संधि ने बाजार से 'टैरिफ वॉर' का डर खत्म कर दिया है। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर ड्यूटी कम करने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
रुपये में मजबूती: डॉलर के मुकाबले रुपये का 91.72 के रिकॉर्ड निचले स्तर से सुधरकर 90.30-90.50 के स्तर पर आना FIIs के लिए सकारात्मक रहा।
आकर्षक वैल्यूएशन: पिछले 4 महीनों की गिरावट के बाद भारतीय शेयरों के दाम (Valuations) अब अन्य एशियाई बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
RBI का रुख: रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने और GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाने से विदेशी फंड्स को सुरक्षा का अहसास हुआ है।
मार्केट के लिए क्या हैं संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि FIIs और DIIs (घरेलू निवेशक) की यह 'जुगलबंदी' निफ्टी को 26,000 और सेंसेक्स को 85,000 के स्तर की ओर ले जा सकती है।
लार्जकैप में तेजी: विदेशी निवेशक मुख्य रूप से बैंकिंग, IT और फार्मा जैसे लार्जकैप सेक्टर्स में पैसा लगा रहे हैं।
DIIs का दबदबा: वर्तमान में निफ्टी-50 में घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी (24.8%) अब विदेशी निवेशकों (24.3%) से अधिक हो गई है, जो भारतीय बाजार की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है।








