Breaking
- Road Repair Alert: कोरबा में सड़कों की मरम्मत तेज करने के निर्देश, निर्माण का...
- Aromatic Rice Farming: सुगंधित धान की खेती से शंकर प्रसाद को मिलेंगे 45 हजार ...
- Sports News: Asian Games 2026 के पदकवीरों से PM मोदी ने की मुलाकात, महिला खिल...
- Raipur News: हल्दी बीज वितरण में अनियमितता, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दिए...
- बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जग...
- VB-G RAM G के तकनीकी सहायकों की राज्य स्तरीय हड़ताल, नियमितीकरण की मांग को ले...
- Raigarh News: किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकत...
- Dantewada News: नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण...
- Narayanpur News: वनांचल में उम्मीदों का जल, नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर मे...
- Raipur News: गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, किसानों को अब 425 रुपय...
500% अमेरिकी टैरिफ़ का ख़तरा: भारत के $120 बिलियन निर्यात पर संकट के बादल

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिनियम 2025' (Sanctioning Russia Act 2025) को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस विवादास्पद द्विदलीय बिल में उन देशों पर 500 फ़ीसदी तक का भारी टैरिफ़ लगाने का प्रावधान है जो रूस से कच्चा तेल या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदना जारी रखते हैं। अगले हफ़्ते इस बिल पर अमेरिकी सीनेट में वोटिंग होने की संभावना है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में हलचल मच गई है।

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के साथ बैठक के बाद इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह बिल उन देशों को दंडित करने के लिए "ज़बरदस्त लाभ" (tremendous leverage) प्रदान करेगा जो पुतिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित कर रहे हैं। हालांकि भारत के साथ अमेरिका के रणनीतिक संबंध रहे हैं, लेकिन वॉशिंगटन अब भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' और रूस से सस्ते तेल के आयात पर कड़ा रुख अपनाता दिख रहा है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह बिल पास होकर कानून बनता है, तो यह भारत के लिए तबाही जैसा होगा। 500% टैरिफ़ का मतलब होगा कि भारतीय सामान अमेरिकी बाज़ार में पूरी तरह से अपनी प्रतिस्पर्धा खो देंगे। भारत वर्तमान में अमेरिका को सालाना $120 बिलियन से अधिक का निर्यात करता है, जो इस टैरिफ़ की चपेट में आने से लगभग ठप हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल ऊर्जा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित करेगा। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ भारत पहले से ही रूसी तेल के कारण 50% तक के अलग-अलग टैरिफ़ झेल रहा है, वहीं चीन पर अभी तक वैसी सख्त कार्रवाई नहीं हुई है, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं।
अब दुनिया की नज़रें अगले हफ़्ते होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। क्या जो बाइडन प्रशासन के दौरान बनी नज़दीकियां ट्रंप के इस कड़े व्यापारिक रुख को नरम कर पाएंगी? भारत सरकार के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है क्योंकि उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ रिश्तों के बीच संतुलन बनाना होगा।







