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पाकिस्तान में फिर दरिंदगी: घर के बाहर से हिंदू मां-बेटी का अपहरण; 11 महीने में 73वां मामला, धर्मांतरण के लिए लड़कियां निशाने पर...

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सिंध प्रांत में घर के बाहर से ही एक हिंदू मां और उनकी नाबालिग बेटी के अपहरण की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हथियारबंद बदमाशों ने सरेआम इस घटना को अंजाम दिया और पीड़ित परिवार की चीख-पुकार के बावजूद उन्हें जबरन वाहन में डालकर ले गए। इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय में डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है, जो लंबे समय से अपनी बेटियों की सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्मांतरण के मामलों पर नजर रखने वाली संस्थाओं के आंकड़े डराने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के शुरुआती 11 महीनों में अब तक हिंदू लड़कियों और महिलाओं के अपहरण के 73 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों में एक विशेष पैटर्न देखा गया है—किडनैपिंग के बाद पीड़ित लड़कियों का जबरन निकाह कराया जाता है और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराकर वीडियो जारी कर दिए जाते हैं, ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई लड़कियां 'सॉफ्ट टारगेट' बनी हुई हैं। स्थानीय पुलिस और प्रशासन अक्सर इन मामलों में मूकदर्शक बना रहता है। कई बार तो पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज करने में ही हफ्तों लगा देती है, जिससे अपराधियों को साक्ष्य मिटाने और पीड़ित को डराने-धमकने का पर्याप्त समय मिल जाता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान में इन अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई सख्त कानून अब तक लागू नहीं हो सका है।
इस हालिया अपहरण कांड के बाद कराची और सिंध के अन्य इलाकों में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी पीड़ित मां-बेटी की रिहाई के लिए मुहिम चलाई जा रही है। हिंदू नेताओं का कहना है कि अब उनके पास अपनी सुरक्षा के लिए देश छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही देश की 90% से अधिक हिंदू आबादी रहती है, जो आए दिन इस तरह की प्रताड़ना का शिकार होती है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे इस व्यवहार पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र की लड़कियों का जबरन विवाह और धर्मांतरण मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। वहीं, पाकिस्तान सरकार इन घटनाओं को 'स्वेच्छा से किया गया धर्मांतरण' बताकर पल्ला झाड़ लेती है। फिलहाल, अपहृत मां-बेटी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे उनके परिवार को किसी बड़ी अनहोनी या जबरन निकाह का डर सता रहा है।







