बिलासपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 और व्यक्ति की निजता के अधिकार से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विवाह पंजीयन आवेदन, जन्मतिथि, पता, फोटो और पहचान पत्र जैसे निजी दस्तावेज तीसरे पक्ष को RTI के जरिए उपलब्ध नहीं कराए जा सकते, जब तक मामले में कोई बड़ा सार्वजनिक हित जुड़ा न हो।
निजी जानकारी की सुरक्षा पर कोर्ट का जोर
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निजी जानकारी और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के अनुसार, किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को केवल RTI आवेदन के आधार पर सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
विवाह पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों में व्यक्ति की पहचान और निजी जीवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं। ऐसे रिकॉर्ड को किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा करने से निजता प्रभावित हो सकती है।
बड़े लोकहित होने पर अलग हो सकता है मामला
हाईकोर्ट ने माना कि RTI कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति की निजी जानकारी हासिल करने के लिए नहीं किया जा सकता। यदि किसी मामले में बड़ा सार्वजनिक हित सामने आता है, तो परिस्थितियों के आधार पर सूचना उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है।
RTI और निजता के बीच संतुलन जरूरी
फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि RTI अधिनियम नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता का अधिकार देता है, वहीं कानून व्यक्ति की निजी जानकारी की सुरक्षा का भी प्रावधान करता है। हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हुआ है कि सार्वजनिक प्राधिकरणों को सूचना देते समय दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
किन जानकारियों को निजी माना गया?
विवाह पंजीयन आवेदन
जन्मतिथि
निजी पता
फोटो
पहचान पत्र से संबंधित जानकारी
अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, किसी दूसरे व्यक्ति की निजी जानकारी केवल RTI आवेदन के आधार पर हासिल नहीं की जा सकती। इसके लिए वैध आधार और आवश्यक होने पर व्यापक लोकहित का होना महत्वपूर्ण होगा।

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