बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ पति की अच्छी आय होने से पत्नी को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। यदि पत्नी बिना पर्याप्त और उचित कारण के पति से अलग रह रही है, तो परिस्थितियों के आधार पर उसका भरण-पोषण का दावा खारिज किया जा सकता है।
पत्नी का भरण-पोषण आवेदन खारिज
मामले में रायपुर कुटुंब न्यायालय ने पत्नी के भरण-पोषण संबंधी आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद इस निर्णय को चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट के अनुसार, पत्नी के अलग रहने के कारण और परिस्थितियों को भी भरण-पोषण के दावे पर निर्णय लेते समय देखा जाना जरूरी है।
सात साल की बेटी के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह
हालांकि, कोर्ट ने नाबालिग बेटी के हित को अलग माना। सात वर्षीय बेटी के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण निर्धारित किया गया। इस तरह अदालत ने बच्चे की जरूरतों और उसके अधिकार को ध्यान में रखते हुए उसके लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित की।
पति की 71 हजार रुपये की सैलरी का भी जिक्र
मामले में पति की मासिक आय करीब 71 हजार रुपये बताई गई थी। लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पति की आय अकेले यह तय करने का आधार नहीं हो सकती कि पत्नी को भरण-पोषण दिया जाए या नहीं। पत्नी के अलग रहने का कारण और मामले के अन्य तथ्यों का भी परीक्षण आवश्यक है।
यह फैसला पति-पत्नी के भरण-पोषण के अधिकार और नाबालिग बच्चे के हित के बीच कानूनी अंतर को रेखांकित करता है। मामले के विशिष्ट तथ्यों के आधार पर ही अदालत ने यह निर्णय दिया है।








