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हार्ट अटैक और स्ट्रोक में 'गोल्डन ऑवर' की अहमियत: एक-एक मिनट है कीमती, डॉक्टर बोले- इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज...

चिकित्सा विज्ञान में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में समय को सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्थितियों में "समय ही मांसपेशी है" (Time is Muscle) और "समय ही मस्तिष्क है" (Time is Brain)। हमले के बाद का पहला एक घंटा, जिसे 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है, मरीज की जान बचाने और भविष्य की विकलांगता को रोकने के लिए सबसे निर्णायक होता है। डॉक्टरों के अनुसार, हर बीतते मिनट के साथ दिल की कोशिकाएं और दिमाग के न्यूरॉन्स तेजी से मरने लगते हैं, जिन्हें बाद में पुनर्जीवित करना असंभव होता है।

हार्ट अटैक के लक्षण कैसे पहचानें?
हार्ट अटैक केवल सीने में तेज दर्द तक सीमित नहीं होता। डॉक्टरों ने निम्नलिखित संकेतों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है:
सीने के बीचों-बीच दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना।
दर्द का हाथों (खासकर बाएं हाथ), गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलना।
बिना किसी मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना और घबराहट होना।
सांस फूलना, मतली या चक्कर आना।
नोट: महिलाओं और मधुमेह रोगियों में कई बार दर्द के बिना केवल अत्यधिक थकान या अपच जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।
स्ट्रोक की पहचान के लिए 'BE FAST' फॉर्मूला
ब्रेन स्ट्रोक की पहचान के लिए डॉक्टरों ने एक सरल फॉर्मूला बताया है:
B (Balance): क्या अचानक संतुलन बिगड़ रहा है?
E (Eyes): क्या अचानक धुंधला या कम दिखाई दे रहा है?
F (Face): क्या मुस्कुराते समय चेहरा एक तरफ झुक रहा है?
A (Arms): क्या एक हाथ उठाने में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो रहा है?
S (Speech): क्या बोलने में लड़खड़ाहट है या शब्द साफ नहीं निकल रहे?
T (Time): यदि इनमें से कोई भी लक्षण है, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाने का समय है।
डॉक्टरों की सलाह है कि लक्षण दिखते ही खुद गाड़ी चलाने के बजाय एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद लें। हार्ट अटैक की स्थिति में, डॉक्टर की सलाह पर एस्पिरिन (Aspirin) चबाना मददगार हो सकता है, लेकिन स्ट्रोक के मामले में बिना डॉक्टर के परामर्श के कोई भी दवा या पानी न दें, क्योंकि इससे स्थिति बिगड़ सकती है। मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाएं जहाँ कैथ लैब (Cath Lab) या सीटी स्कैन (CT Scan) और न्यूरोलॉजिस्ट की सुविधा उपलब्ध हो।







